बरेली। जिले के किसान अब सिर्फ फसल उगाकर ही नहीं, बल्कि पेड़ों को संरक्षित कर भी कमाई कर सकेंगे। पर्यावरण संरक्षण को आमदनी से जोड़ने वाली कार्बन क्रेडिट योजना के तहत यह पहल की गई है। इसके तहत 239 किसानों ने करीब डेढ़ लाख से अधिक पौधों को बचाना शुरू कर दिया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कार्बन क्रेडिट का कारोबार अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ा है। इससे किसानों को डॉलर में कमाई का अवसर भी मिलेगा।
इन पौधों से वातावरण में कार्बन का अवशोषण होगा। तय मानकों के आधार पर किसानों को कार्बन क्रेडिट मिलेंगे। इन क्रेडिट को बाजार में बेचकर किसानों को अतिरिक्त आय होगी। किसानों ने आम, बेल, जामुन, अमरूद, संतरा और नींबू जैसे फलदार पौधे लगाए हैं। योजना को लागू करने के लिए द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) की टीम जिले में पहुंची। टीम ने चयनित किसानों के खेतों में पौधों का स्थलीय निरीक्षण किया। पौधों की संख्या और स्थिति का सत्यापन कर सर्वे रिपोर्ट विभाग को सौंप दी गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पहले किसानों के लिए पौधे लगाना और उन्हें बचाए रखना एक अतिरिक्त जिम्मेदारी मानी जाती थी। कार्बन क्रेडिट योजना इस धारणा को बदलने वाली है। किसान जितने अधिक पौधों को संरक्षित रखेंगे, उनका पर्यावरणीय महत्व उतना ही बढ़ेगा। इससे उन्हें तय प्रक्रिया के तहत आर्थिक लाभ भी मिल सकेगा।
डेढ़ लाख से अधिक पौधों की कार्बन बैंकिंग
इस योजना में 239 किसानों द्वारा संरक्षित किए जा रहे करीब 1,77,752 पौधे आधार हैं। इन पौधों द्वारा वातावरण से अवशोषित किए जाने वाले कार्बन का आकलन किया जाएगा। निर्धारित मानकों पर खरा उतरने के बाद कार्बन क्रेडिट तैयार होंगे। इसके बाद किसानों को इन क्रेडिट के माध्यम से आर्थिक लाभ मिलने का रास्ता खुलेगा। कार्बन क्रेडिट पर्यावरण के लिए किए गए ऐसे काम का प्रमाण है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम करने या कार्बन सोखने में मदद मिलती है।
वर्जन
जिले में 239 किसानों ने कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना से जुड़कर 1 लाख 77 हजार से अधिक पौधों का सरंक्षण कर रहे हैं। शासन स्तर से आई तकनीकी टीम ने भी इन पौधों का मूल्यांकन पूर्व में किया है। इस प्रयास से पर्यावरण सरंक्षण के साथ ही किसानों को आर्थिक समृद्धि भी मिलेगी। - दीक्षा भंडारी, डीएफओ