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सितारगंज हाईवे : रिठौरा में अंडरपास का निर्माण शुरू, तीन स्थानों पर अड़चन बरकरार

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बरेली। बरेली-सितारगंज हाईवे पर रिठौरा में अंडरपास के निर्माण की अड़चन दूर हो गई है। पांच माह बाद एक बार फिर वहां अंडरपास की रिटेनिंग वॉल का निर्माण शुरू हो गया है। वहीं, बरकापुर में 300 मीटर, लाड़पुर उस्मानपुर में 500 मीटर, फरीदपुर गंगा उर्फ नवादा में हाईवे के 300 मीटर हिस्से के चौड़ीकरण में अड़चन बरकरार है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अफसरों ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएएलओ) से संपर्क किया है। एसएएलओ ने अड़चनें दूर कराने की पहल शुरू की है
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रिठौरा से मुड़िया अहमदनगर तक अंडरपास के साथ ही चार किलोमीटर लंबे बाइपास का निर्माण होना है। पांच महीने पहले मुआवजे को लेकर मामला फंसने की वजह से काम रुक गया था। मुआवजे का प्रकरण अभी पूरी तरह से हल नहीं हो सका है, लेकिन पांच दिन पहले राजस्व विभाग ने पुलिस बल को साथ लेकर एनएचएआई की कार्यदायी संस्था को बलपूर्वक कब्जा दिला दिया है।
एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने चारों स्थानों का मुआवजा एसएलएओ के पास जमा कर दिया है। इसके बावजूद जमीन पर कब्जा मिलने में देरी हो रही है। इससे काम अटकेगा। एनएचएआई के परियोजना प्रबंधक ने प्रशासन से बलपूर्वक कब्जा दिलाने का आग्रह किया है। बरेली-सितारगंज हाईवे टू से फोरलेन होना है। मार्च 2024 से काम चल रहा है।
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18 भू स्वामियों का अंश निर्धारण हो तो बने बात
लाड़पुर उस्मानपुर में 18भू स्वामियों के अंश निर्धारण का वाद एसडीएम की कोर्ट में विचाराधीन है। इसका निस्तारण होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि किसके खाते में कितने रुपये मुआवजा भेजा जाए? वैसे जमीन और स्ट्रक्चर की कीमत के हिसाब से एनएचएआई और एसएलएओ ने मुआवजा तय कर दिया है, लेकिन वितरण नहीं हो पा रहा है।
अधिक अधिग्रहण को लेकर फंसा है पेच
बरकापुर में तीन किसानों का दावा है कि जितना मुआवजा दिया जा रहा है, उससे अधिक जमीन ली जा रही है। इस संबंध में एनएचएआई ने एसएलएओ से परीक्षण कर प्रकरण निस्तारित करने का आग्रह किया है। किसानों की बात कितनी सही है? यह तय होते ही चौड़ीकरण की बाधा दूर हो जाएगी।
बंजारों को सार्वजनिक भूमि मिलने का इंतजार
फरीदपुर गंगा उर्फ नवादा में बंजारे सार्वजनिक भूमि पर बसे हुए हैं। उन्हें दूसरी जगह बसाया जाना है। राजस्व विभाग को दूसरी जगह जमीन देनी है और उस पर आशियाना बनाने के लिए एनएचएआई को मुआवजा देना है। एनएचएआई ने करीब 50 लाख रुपये देने का आकलन कराया है, लेकिन भुगतान तब तक नहीं हो सकता है, जब तक दूसरे स्थान पर सार्वजनिक भूमि तय न हो जाए। ब्यूरो
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