बरेली। टपरी डिस्टिलरी में 100 करोड़ की टैक्स चोरी के मामले में उन्नाव, कानपुर के शराब गोदामों के मैनेजर अशोक दीक्षित के पकड़े जाने के बाद एसआईटी को काफी अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। अब एसआईटी शराब कोरोबारी मनोज जायसवाल और अजय जायसवाल के नाम की दुकानों और गोदामों का एक साल पहले का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। पता लगाया जा रहा है कि कितने ट्रक इन गोदामों में आए और कितनों की एंट्री दर्ज है। टैक्स चोरी कर टपरी डिस्टिलरी से जो शराब लाई जाती थी, उसका ब्योरा ढूंढा जा रहा है। डिस्टिलरी से गोदाम और गोदाम से दुकान तक इस अवैध शराब की बिक्री कैसे हो जाती थी। इसके लिए बरेली, उन्नाव और कानपुर में मनोज तथा अजय के गोदामों में एक बार फिर एसआईटी रिकॉर्ड खंगाल सकती है।
मनोज जायसवाल के पकड़े जाने के बाद एसआईटी ने कानपुर से अजय जायसवाल के मैनेजर अशोक दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया था। कानपुर और उन्नाव के गोदामों में शराब का लेखा जोखा अशोक ही रखता था। बरेली के गोदाम का लेखा जोखा रखने वाला भी एसआईटी के निशाने पर है। दरअसल, यह पता लगाया जा रहा है कि टपरी डिस्टिलरी से बगैर टैक्स दिए कितने ट्रक शराब लादकर निकाले गए। ये किन-किन जिलों में गए और वहां किस-किस दुकान पर शराब की सप्लाई की गई।
उन्नाव और कानपुर के अलावा बरेली में भी अजय जायसवाल के नाम पर शराब का गोदाम हैं। सबसे खास बात यह है कि बरेली में तो टपरी डिस्टिलरी की शराब का ट्रक भी पकड़ा गया। इससे साफ हो चुका है कि बरेली में भी टैक्स चोरी कर लाई जा रही शराब खपाई जा रही थी। अब एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि किस जनपद में कितने ट्रक शराब खपाई गई। यह जानने के लिए शराब कारोबारियों के दस्तावेज एसआईटी अपने कब्जे में ले चुकी है। मैनेजर अशोक दीक्षित ने जो कुछ बताया है उसके बाद एसआईटी को मनोज और अजय का पूरा खेल समझ में आ चुका है। आबकारी विभाग की मिलीभगत से मनोज जायसवाल ने सरकार को करोड़ों का घाटा पहुंचाया।