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Bareilly News: नियम विरुद्ध भूसा खरीद पर चुप्पी, फर्म पर मढ़ रहे दोष

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बरेली। मनमाने तरीके से भूसा खरीद और घपलेबाजी के आरोपों से घिरे खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अब आपूर्ति के लिए चयनित फर्म पर दोष मढ़ रहे हैं। अब तक किसी भी बीडीओ ने अपने जवाब में ये नहीं बताया कि नियम विरुद्ध भूसे की खरीदारी क्यों की गई? न ही ये बताया कि यदि फर्म खराब भूसा दे रही थी और घटतौली कर रही थी तो उनकी ओर से क्या कार्रवाई की गई? सीवीओ स्तर से कभी फर्म को नोटिस तक जारी नहीं किया गया। अब घपलेबाजी पकड़ में आने पर सबको भूसे की गुणवत्ता याद आ रही है।
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भेजे गए जवाब में एक बीडीओ ने बताया है कि नामित फर्म एमएस इंटरप्राइजेज सीलन और फंगसयुक्त भूसा दे रही थी। दूसरे बीडीओ का कहना है कि फर्म का भूसा मिट्टीयुक्त और मोटा था। रामनगर बीडीओ ओमप्रकाश ने अपने स्पष्टीकरण में फर्म पर घटतौली का आरोप लगाया है। कहा है कि भूसा गुणवत्ताविहीन होने से गोवंश के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका थी। इसी वजह से ग्राम प्रधान व सचिव ने फर्म से भूसा लेने से इन्कार कर दिया। बीडीओ ने कहा है कि इस संंबंध में तत्कालीन मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) को मौखिक रूप से बताया भी गया था। यह भी कहा है कि टेंडर का रेट स्थानीय स्तर के मूल्य से अधिक है।
चोकर, नमक और हरे चारे के लिए कोई मद नहीं
जवाब में कहा गया है कि एक गोवंशीय पशु के लिए एक दिन में कम से कम पांच किग्रा भूसा चाहिए। टेंडर की दर से इसका मूल्य 45 रुपये पड़ रहा था। इसके अतिरिक्त पशुओं को चोकर, नमक और हरा चारा भी चाहिए। इसके लिए अलग से कोई मद नहीं है। गोशाला संचालक को अन्य कार्य जैसे मृत पशुओं का निस्तारण, नवजात एवं बीमार पशुओं का प्रबंधन और ठंड में लकड़ी की व्यवस्था करनी पड़ती है। रामनगर बीडीओ ने ये भी कहा है कि फर्म स्वामी ने उनके ब्लॉक में कभी संपर्क ही नहीं किया। इस वजह से फर्म से न तो कोई खरीद की गई, न ही कोई बकाया है। संवाद
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भूसा खरीद मामले में बीडीओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। - डॉ. मनमोहन पांडेय, सीवीओ
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