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कराहती रही गर्भवती, अस्पताल से भगा दिया, सड़क पर जनी बेटी

Wed, 04 May 2016 01:45 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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सीएमओ पहुंचे भोजीपुरा सीएचसी
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जननी सुरक्षा योजना वसूली का हथकंडा बनकर सामने आई है। प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती जैसे-तैसे सीएचसी पहुंची तो भर्ती करने के लिए 500 रुपये मांगे गए। पति की जेब में सिर्फ तीन सौ रुपये थे। वह गिड़गिड़ाया कि हालत ठीक नहीं। कभी भी बच्चा हो सकता है लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई और हीमोग्लोबिन कम बताकर जिला अस्पताल के लिए रेफर करने की स्लिप बना थमा दी गई। गरीब परिवार के पास जिला अस्पताल तक जाने के पैसे नहीं थे तो गर्भवती को लेकर घर लौटने लगे। आठ किलोमीटर टेंपो का सफर गर्भवती ने छटपटाते हुए किया और आखिर में सड़क किनारे ही बच्ची को जन्म दिया। राहगीरों ने लखनऊ फोन कर एंबुलेंस बुलाई तो यह सोचकर कि हो सकता है कि सीएचसी वाले अब मान जाएं। पति जच्चा और बच्ची दोनों को लेकर फिर सीएचसी पहुंचा लेकिन यहां तो संवेदनहीन स्टाफ ने देखने से ही इंकार कर दिया। कहा कि प्रभारी चिकित्सक के आदेश के बिना भर्ती नहीं करेंगे और प्रभारी मीटिंग में गए हैं। डेढ़ घंटे इंतजार के बाद फिर परिवार जच्चा और बच्चा को लेकर घर लौट गया। शुक्र है कि अब तक दोनों स्वस्थ हैं लेकिन इन्हें कुछ भी हो सकता था। 
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आशा बहू वीरवती परेवा मोहम्मद अली गांव के रामपाल की पत्नी किरन और रूपचंद की पत्नी मीना को मंगलवार सुबह साढ़े दस बजे 108 एंबुलेंस से सीएचसी भोजीपुरा लेकर आई। बताया जा रहा है कि वहां मौजूद डॉक्टर शांता दत्ता और स्टाफ  नर्स सोनी ने दोनों को देखे बिना ही बरेली जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। दोनों का हीमोग्लोबिन कम होने का हवाला दिया गया। आशा बहू मीना को लेकर एंबुलेंस से जिला अस्पताल चली गई। रामपाल अपनी चाची सुनीता और पत्नी किरन को लेकर टेंपो से आठ किमी दूर नैनीताल रोड पर आटामांडा तिराहे पर आ गया। साढ़े 12 बजे अचानक उसे दर्द उठा तो रामपाल ने उसे सड़क किनारे लिटा दिया। आधे घंटे बाद ही उसने बेटी को जन्म दे दिया।
सड़क पर किलकारी गूंजने पर राहगीरों की भीड़ लग गई। टेंपो चलाने वाले राजेश शर्मा ने 108 नंबर पर फोन कर लखनऊ शिकायत की तो डेढ़ बजे 108 एंबुलेंस पहुंच गई। वहां से दोनों को सीएचसी ले जाया गया। तब तक दो बज चुके थे। डॉक्टर जा चुके थे। सिर्फ स्टाफ नर्स प्रिया सक्सेना मौजूद थी। आरोप है कि उसने जच्चा-बच्चा का इलाज कराने से मना कर दिया। नर्स का कहना था कि बच्चा अस्पताल से बाहर हुआ है इसके लिए प्रभारी चिकित्सा की अनुमति जरूरी है और वह इस समय सीएमओ की बैठक में हैं, फोन बंद है। महिला का पति कोई दवा देने की गुहार लगाता रहा मगर उसकी नहीं सुनी गई। करीब डेढ़ घंटे तक अस्पताल के एक कोने में पड़े रहने के बाद रामपाल पत्नी और बच्चे को टेंपो से घर ले आया। 
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हां हमसे 500 रुपये मांग गए
प्रसूता किरन की चाची सुनीता ने कहा कि सुबह साढे़ दस बजे जब अस्पताल पहुंची तो करीब 11 बजे एक लेडी डॉक्टर आई और पांच सौ रुपये मांगे। हमने रुपये नहीं होने की बात कही तो बरेली जाने को कह दिया गया। बरेली जाकर ज्यादा रुपये न मांग लें, इसलिए वहां नहीं गए। 

गर्भवती महिला आई थी लेकिन उसका हीमोग्लोबिन 8 ग्राम पाया गया। प्रसव हो जाता, लेकिन बाद में खून चढ़ाने और अन्य दिक्कत न हो इसके लिए तीमारदाराें को बताकर रेफर किया गया। 102 और 108 बुलाने की ड्यूटी हमारी नहीं है। वह लखनऊ से देखी जाती है इसलिए तीमारदार सीधे फोन कर सकते हैं। प्रसव होने के बाद वे फिर अस्पताल लेकर आए थे, महिला को भर्ती भी किया गया लेकिन तीमारदार उसे ले गए। लिखित शिकायत मिली तो दोषियों के खिलाफ  जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। कल स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। सीएचसी पर लेडी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। डिलीवरी का काम स्टाफ  नर्स और एचबी शांता दत्ता देखती हैं। इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉ. अमित थे। चूंकि प्रसव अस्पताल के बाहर हुआ है इसलिए प्रसूता को जननी सुरक्षा योजना का लाभ भी नहीं मिलेगा।
-डॉ. सौरभ सिंह, प्रभारी सीएचसी भोजीपुरा

किरन ने जनवरी में जांच कराई तो हीमोग्लोबिन कम था। उसका मुंह पीला पड़ गया था। इसलिए उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। लेडी डाक्टर हैं नहीं, स्टाफ  नर्स इतना बड़ा रिस्क कैसे उठा सकती हैं।
-शांता दत्ता, सुपरवाइजर सीएचसी भोजीपुरा

सुरक्षित प्रसव सरकार की प्राथमिकता में है। यह बहुत गंभीर मामला है। पहले जांच कराई जाएगी और दोषी पर कार्रवाई होगी।
-डॉ. सुबोध शर्मा, संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण

जननी सुरक्षा योजना के पैसों पर होती है सौदेबाजी
पहले भी कई बार की गई हैं स्वास्थ्य विभाग में शिकायत 
सीएचसी पर ज्यादातर मामलों में होती है वसूली
पचास फीसदी पहले ही वसूल लेता है स्टाफ
अगर यह कहा जाए कि जननी सुरक्षा योजना का मतलब 1400 रुपये..तो गलत नहीं होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल में प्रसव होने पर जननी सुरक्षा योजना के तहत जननी को चेक मिलता है। इस धन पर कई की निगाह रहती है। सीएचसी लाने वाले से लेकर इलाज करने वाले तक। भोजीपुरा सीएचसी पर जो हुआ यह भी उसी का हिस्सा था। दरअसल यही कहकर धमकाया जाता है कि जो रुपये मिलेंगे उसमें हमारा भी तो हिस्सा है। 
कई बार विवाद की जड़ बन चुके हैं यह चेक। इसको लेकर तमाम जांचें हुईं लेकिन यह बंदरबांट बंद नहीं हुई। पिछले दिनों महिला अस्पताल में एक दलाल को पकड़ा भी गया था। खूब हो हल्ला मचा लेकिन इस पर अंकुश नहीं लगा। हर महीने जननी सुरक्षा योजना से जुड़ी आधा दर्जन शिकायतें स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंच रही हैं। प्रसव के लिए पहुंचने वाल महिला के परिवार वालों से उसी पैसे की सौदेबाजी होती है जिसको लेकर हंगामा मचता है। भोजीपुरा के केस में यही हुआ जब पैसा नहीं दिया गया तो रेफर कर दिया। और इस घबराहट में कि यहां पांच सौ रुपये मांग रहे हैं कहीं वहां हजार मांग लिए तो क्या करेंगे...घर लौटने लगे। इस घटना के बाद एक और जांच की बात की जाने लगी है...देखिए अफसर क्या सुधार कर पाते हैं। 

एक साल से क्यों नहीं हो रही तैनाती
भोजीपुरा। सीएचसी में एक साल से लेडी डॉक्टर का पद रिक्त है। लोगों की शिकायत के बावजूद तैनाती नहीं हो रही है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. सौरभ सिंह यह कहकर जिम्मेदारी से बच रहे हैं कि मामला सीएमओ साहब के संज्ञान में है। लोगों का आरोप है कि लेडी डॉक्टर के न होने का बहाना बनाकर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। कई बार तो मिठाई के नाम पर वसूली भी की जाती है। 

देर रात सीएचसी पहुंच गए सीएमओ, हड़कंप मचा  
बरेली। गर्भवती महिला का प्रसव सड़क पर होने की सूचना देर शाम सीएमओ को मिली। रात करीब साढ़े नौ बजे के बाद डॉ. विजय यादव भोजीपुरा सीएचसी पहुंच गए। यहां स्टॉफ नर्स और लेडी हेल्थ वर्कर को नोटिस जारी किया गया है। बुधवार सुबह जांच को टीम जाएगी। सीएमओ ने निरीक्षण में पाया कि स्वास्थ्य केंद्र पर चादर गंदी थी। ऑक्सीजन सिलिंडर भी ट्राली पर नहीं था। लाइट की कमी के चलते अस्पताल में अंधेरा था। तुरंत कमियाें को दूर करने को कहा गया। सीएमओ ने गर्भवती महिला से जुड़े मामले पर पूछताछ की। सीएमओ ने बताया कि स्टॉफ ने जानकारी दी कि आशा अपने साथ दोनों महिलाआें को लेकर आई थी। दोनों का हीमोग्लोबिन चेक करने के बाद बरेली जिला अस्पताल के लिए रिफर किया गया था। 
सीएमओ को क्या दी गई जानकारी
1.क्या बताया गया: सीएमओ जब निरीक्षण को पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि एक गर्भवती ने ऑपरेशन के डर से बरेली आने से मना कर दिया, जबकि दूसरी महिला को लेकर आशा बरेली चली आई।
यह थी हकीकत: हीमोग्लोबिन की जांच नहीं की गई। जनवरी में हुई जांच को आधार बनाकर ही रिफर कर दिया गया। आपरेशन के डर से नहीं पैसा मांगने के बाद महिला को परिवार वाले ले गए थे।
2.क्या बताया गया: सीएमओ ने बताया कि महिला प्रसव के बाद दोबारा भी अस्पताल आई थी, जहां दो घंटे रहने के बाद उसके परिवार वाले फिर घर ले गए
हकीकत: प्रसव होने के बाद महिला को दोबारा सीएचसी लाया गया था। यहां कई बार कहने के बाद भी इलाज नहीं किया गया। स्टाफ ने कहा कि बाहर की मरीज है भर्ती नहीं करेंगे। प्रभारी कहेंगे तो करेंगे। जबकि प्रभारी चिकित्साधिकारी का फोन बंद था। तब परिजन घर ले गए थे।
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 इस मामले पर फिलहाल स्टाफ नर्स और हेल्थ वर्कर को नोटिस जारी किया गया है। बुधवार को महिला के बयान दर्ज किए जाएंगे और टीम जांच करेगी। 
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