बरेली। पीवी सिंधु की ओलंपिक और विश्व स्तरीय उपलब्धियां, साइना नेहवाल की आक्रामक खेल शैली और लक्ष्य सेन जैसे युवा खिलाड़ियों की सफलता से प्रेरित जिले के शटलर भी परिश्रम से अपनी पहचान गढ़ने की जद्दोजहद कर रहे हैं। कोई अभिभावकों के प्रोत्साहन से तो कुछ टीवी पर रोमांचक मुकाबले देखकर रैकेट थाम रहे हैं और देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना संजोए हुए आगे बढ़ रहे हैं।
पिता के सपने को जी रहीं एडिशा
आंवला निवासी एडिशा (13) बताती हैं कि उनके पिता स्वयं खेलों में आगे नहीं बढ़ पाए तो उन्होंने बेटी को आगे बढ़ाने की सोची। नियमित अभ्यास, अनुशासन से एडिशा अब तक दो राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी हैं। पीवी सिंधु को आदर्श मानने वाली एडिशा पिता के सपने को जी रही हैं।
खेल में आगे जाना चाहती हैं अनाया
अनाया (10) ने पिता के कहने पर रैकेट थामा। अब वह नियमित प्रशिक्षण ले रही हैं और प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुकी हैं। साइना नेहवाल को आदर्श मानने वाली अनाया का कहना है कि वह पढ़ाई के साथ खेल में भी आगे जाना चाहती हैं। परिवार का सहयोग व आत्मविश्वास उनको मजबूती दे रहा है।
टीवी पर मैच देखकर मिली प्रेरणा
सिविल लाइंस निवासी कैरोल जॉर्ज (18) ने टीवी पर बैडमिंटन के मुकाबले देखकर रैकेट थाम लिया। निरंतर अभ्यास से तकनीक को निखारा। वह आगरा में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीत चुकी हैं। कैरोल, लक्ष्य सेन और पीवी सिंधु की प्रशंसक हैं। वह भारत के लिए खेलने का सपना देख रही हैं। संवाद