इस मामले में दर्ज हैं तीन मुकदमे, अब तक 19 आरोपी जा चुके हैं जेल
बरेली। श्रीगंगा इन्फ्रासिटी ठगी प्रकरण में गिरफ्तार हो चुके राजेश मौर्य के मैनेजर और एजेंट समेत दस लोगों के खिलाफ क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर ने थाना बारादरी में रिपोर्ट दर्ज कराई है। सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपयों की ठगी के मामले में ये आरोपी करीब दो साल से फरार चल रहे हैं, जिसके चलते क्राइम ब्रांच ने अब कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी है।
क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर रामनरेश माथुर की तहरीर पर थाना बारादरी में चंद्रगुप्तपुरम निवासी रीना शाक्य, मेरठ में एकतानगर पल्लवपुरम निवासी आदित्य कुमार, प्रेमनगर के शास्त्रीनगर निवासी इकराम मौर्य, उसकी पत्नी मिथलेश, बदायूं में शेखूपुर निवासी मोहनलाल मौर्य, बारादरी की सैनिक कालोनी निवासी गंगाराम मौर्य, बिहारीपुर निवासी कमल श्रीवास्तव, रोहली टोला निवासी संजीव गुप्ता, चौधरी तालाब निवासी शमी उर्फ शमीम अहमद, आकाशपुरम निवासी राजीव पाठक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। रिपोर्ट में इंस्पेक्टर ने लिखाया है कि ये सभी आरोपी घरों पर नोटिस चस्पा होने के बाद भी कोर्ट में पेश नहीं हुए और फरार चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट के बाद पुलिस इन आरोपियों की कुर्की करने की तैयारी में है।
यह था मामला
वर्ष 2018 में थाना बारादरी में श्रीगंगा इन्फ्रासिटी के एमडी पीलीभीत बाईपास पर चंद्रगुप्तपुरम कालोनी निवासी राजेश मौर्य, एजेंट अजय मौर्य, मनोज मौर्य, दिनेश मौर्य, सिविल लांइस में वसुंधरा होटल के पीछे रहने वाले विश्वनाथ मौर्य, कृष्णनाथ मौर्य, शिवनाथ मौर्य और संदीप सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि सैकड़ों लोगों से कंपनी में करोड़ों रुपये निवेश कराने के बाद ये आरोपी फरार हो गए हैं। किसी को मोटा मुनाफा तो किसी को प्लाट देने के बहाने ठगी की गई थी। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने तीन रिपोर्ट दर्ज की थीं। राजेश मौर्य, उसके पिता रामदेव मौर्य और परिवार के कई लोगों समेत कुल 19 लोगों को जेल भेजा था। राजेश मौर्य अब भी जेल में है।
क्रिप्टो करेंसी का मास्टरमाइंड है आदित्य
श्रीगंगा इन्फ्रासिटी ठगी प्रकरण में एक रिपोर्ट जुलाई 2018 में रोहली टोला निवासी राजीव गुप्ता ने दर्ज कराई गई थी। इसमें 15 लोग वादी बने थे। क्रिप्टो करेंसी एनडब्ल्यूटी क्वाइन को लेकर दर्ज कराई गई इस रिपोर्ट के मुताबिक लोगों को बताया गया कि दस पैसे में क्वाइन लांच किया है। एक लाख रुपये से कम के क्वाइन न देने की बात कही और फिर लोगों से करोड़ों रुपये ठग लिए। किसी को क्वाइन तो नहीं मिले लेकिन फर्जी रसीदें दे दी गईं। आरोप था कि नोएडा में क्वाइन का काम देखने की जिम्मेदारी मेरठ निवासी आदित्य की थी, जिसे वहां मैनेजर बनाकर बैठाया गया था। लोगों से करोड़ों निवेश कराकर यह लोग फरार हो गए। फरारी दस लोगों के खिलाफ बुधवार को दर्ज हुई रिपोर्ट में आदित्य को भी नामजद किया गया है।