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दुकानें खुलीं बारह बजे, आठ बजे ही घेरों में रख दिए जूते-चप्पल और हेलमेट

सार

शराब की दुकानें खुलते ही जो नजारा सामने आया, उसने न सिर्फ हर किसी को शर्मिंदा किया बल्कि कोरोना की भयावह जंग में बहुत-कुछ दांव पर लगाने वाले लोगों के लिए कई नई चिंताएं भी पैदा कर दीं। गले से नीचे उतरने के पहले ही शराब ने ऐसा मजबूर किया कि सामाजिक शर्म और कानून दोनों ताक पर रखे रह गए। देसी हो या अंग्रेजी, हर वाइन शॉप के सामने लॉकडाउन की इस कदर धज्जियां उड़ीं कि पुलिस फोर्स और उसके अफसर भी दुविधा में पड़ गए कि शराब की दुकानों के बाहर बेशर्मी की हदें तोड़ते लोगों को संभालें या पहले से चली आ रही जिम्मेदारियों को पूरा करें। कई अफसर दबी जुबान से सरकार के शराब की दुकानें खुलवाने के फैसले की आलोचना करने से भी नहीं चूके। इन दुकानों पर इकट्ठी भीड़ में शराब खरीदने की इस कदर मारामारी थी कि आपस में सामाजिक दूरी बनाए रखने की हिदायतें एक तरफ रखी रह गईं। शराब के शौकीनों की लाइनें लंबी होती गईं तो कई दुकानों के सामने सड़कों पर इस लॉकडाउन में भी जाम लगने की नौबत आ गई। लोग एक-दो बोतलें नहीं बल्कि राशन की खरीदारी को भी मात देते हुए पेटियां खरीदने पर आमादा थे। इस बीच शराब की दुकानों पर ओवररेटिंग भी हुईं लेकिन करीब डेढ़ महीने की तलब इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि कहीं कोई विरोध नहीं हुआ। जितने पैसे मांगे, उतने दिए और शराब की बोतलें लेकर चलते बने। शराब की दुकानें खोलने का फैसला चूंकि सरकारी था लिहाजा पुलिस ने भी बहुत ज्यादा सख्ती करने से परहेज किया। कई दुकानों पर सामाजिक दूरी के साथ लाइनें लगवाने की कोशिश जरूर की लेकिन यह कोशिश किसी काम नहीं आ सकी।
 
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बरेली के डीडीपुरम में लगी शराब खरीदने वालों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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विस्तार
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लॉकडाउन-3 का पहला दिन उन हैरतअंगेज नजारों के नाम रहा जो शराब की दुकानों पर दिखाई दिए। दुकानें खुलनी थीं दस बजे से लेकिन आठ बजे से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। नौ बजे तक अच्छी-खासी भीड़ इकट्ठी हो गई। धूप बर्दाश्त नहीं हुई तो सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बनाए गए घेरों में अपने चप्पल-जूते और हेलमेट रखकर अलग खड़े हो गए। दरअसल आदेश के मुताबिक दुकानें 10 बजे से ही खुलनी थीं लेकिन दुकानों में पहले से आबकारी विभाग की सील लगी होने और नया सरकारी आदेश न मिलने से दुकानदार झिझकते रहे। जब दूसरे जिलों में दुकान खुलने के फोटो-वीडियो आने लगे तो 12 बजे बरेली में भी दुकानें खुलनी शुरू हुईं। इसके साथ ही मारामारी भी शुरू हो गई। कुछ ही देर बाद भीड़भाड़ का यह नजारा राशन की दुकानों को मात देने लगा।

एहतियात: आधार कार्ड लेकर पहुंचे

कई लोग इस अंदेशे में आधार कार्ड साथ लेकर शराब खरीदने पहुंचे कि ऐन वक्त पर कोई पहचान मांग लिए जाने की वजह से उन्हें बगैर शराब वापस न लौटना पड़े। लाइन में आधार कार्ड हाथ में थामे खड़े लोगों ने कहा कि नियम बदलते रहते हैं इसीलिए वे आधार कार्ड लेकर आए हैं।

इतनी बिकी शराब कि रिटेल शॉप पर कुछ घंटों में खत्म हुआ स्टॉक

ज्यादातर लोगों ने राशन की तरह शराब की बोतलें भी जरूरत से कहीं ज्यादा खरीदीं। डर यह था कि कहीं आगे शराब मिले न मिले। मनपसंद ब्रांड नहीं मिला तो जो उपलब्ध था वही खरीद लिया। वह भी एक-दो बोतल नहीं बल्कि पूरी पेटी। रेट भी नही पूछा, सेल्समैन ने जो मांगा उसे दे दिया। महंगे ब्रांड की मांग ज्यादा रही, देसी शराब पर भीड़ अपेक्षाकृत कम थी। कई लोग बोतलें लेने के लिए बोरी लेकर पहुंचे। शराब इस कदर बिकी कि रिटेल वाइन शॉप पर कुछ ही घंटों में स्टॉक खत्म होने की स्थिति में आ गया। इस बीच किसी भी दुकान पर सामाजिक दूरी की स्थिति नहीं दिखी। सैनिटाइजर का इस्तेमाल भी नहीं किया गया। कई दुकानों के सेल्समैन न ग्लब्स पहने थे न मास्क और कैप।

दुकान खुलने के इंतजार में कीर्तन

सुबह नौ बजे ही पहुंचे संजीव जिंदल को डीडीपुरम की माडल शॉप बंद मिली तो उन्होंने उसके खुलने का इंतजार करते हुए सामने बने गोले में बैठकर कीर्तन शुरू कर दिया। पूछा तो बोले, दुकान जल्दी खुलने लिए ध्यान लगाया था।
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.. और तय हुआ कोटा, एक आदमी को दो बोतल
भीड़भाड़ बढ़ने पर प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया। टीवी पर देश भर से शराब खरीदने के लिए चल रही मारामारी की खबरें भी आने लगी थीं। इसके बाद आबकारी विभाग से निर्देश जारी हुआ कि एक व्यक्ति को दो से ज्यादा बोतल न दी जाएं लेकिन इसका असर कुछ ही दुकानों पर दिखा। दुकानों पर मारामारी देख शराब कारोबारी जमाल सिद्दीकी, आदेश पांडे, नवनीत अग्रवाल आदि भी दुकानों पर हालात संभालने पहुंचे।

चरमराया लॉकडाउन तो भन्नाए एएसपी ने खुद काटे चालान.. पुलिस वालों को भी नहीं छोड़ा

बरेली। इधर शराब की दुकानें खुलीं और उधर लॉकडाउन एक तरफ रखा गया। नशा करने वालों ने नगर निगम के शराब की दुकानों के बाहर बनाए गोलों की अनदेखी कर सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ानी शुरू कीं तो अफसरों के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगीं। हालात देखकर एएसपी अभिषेक वर्मा इतने भन्नाए कि कालीबाड़ी रोड पर गाड़ियों के चालान की खुद जिम्मेदारी संभाल ली। कई पुलिस वाले भी उनके लपेटे में आ गए।
शराब की दुकानों के बाहर आठ बजे से ही भीड़ इकट्ठी होनी शुरू हो गई। लाइन में खड़े लोगों ने चार-चार घंटे दुकान खुलने का इंतजार किया और उनके शटर उठते ही शराब के लिए टूट पड़े। पुलिस वालों ने काफी कोशिश की लेकिन सामाजिक दूरी का पालन कराने में नाकाम रही। सड़कों पर भी शराब के लिए दुकानों पर जाते और लौटते लोगों की गाड़ियों का रेला सा नजर आने लगा। कुछ ही घंटों में लॉकडाउन को बुरी तरह ध्वस्त होता देख पुलिस अधिकारी सकते में आ गए। एएसपी अभिषेक वर्मा ने कई इलाकों में सड़क पर टीम के साथ चालान काटे। कालीबाड़ी रोड पर उन्होंने ताबड़तोड़ कार्रवाई की। परिवार के साथ बाइक पर जा रहे कई पुलिस वाले भी चालान से नहीं बच पाए।

देसी शराब वाले बेलिहाज.. पॉश इलाकों में चेहरों पर डाला नकाब

अयूब खां चौराहे से चौपुला रोड पर देसी शराब की दुकान करीब 11 बजे खुली मगर पहले ही यहां एकदूसरे से सटे लोगों की लंबी कतार लगी हुई थी। ज्यादा से ज्यादा शराब लेने की होड़ भी चल रही थी। उधर, डीडीपुरम जैसे पॉश इलाकों में शराब लेने को लाइन में लगे लोगों की नजर जैसे ही मीडिया के कैमरों पर पड़ी तो उन्होंने चेहरे छिपाने शुरू कर दिए। किसी ने मुंह पर रुमाल डाल लिया तो किसी ने हाथ से चेहरा ढक लिया।
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