बरेली। रिटायरमेंट के बाद लोग आराम करना पसंद करते हैं, लेकिन शालिनी ने इस धारणा को तोड़ते हुए टेबल टेनिस में नई पहचान बनाई है। आशीष रॉयल पार्क निवासी शालिनी गोयल जनवरी 2021 में केंद्रीय विद्यालय से सेवानिवृत्त हुईं थीं। इसके बाद अपने खाली समय का सदुपयोग करने, खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रखने के लिए उन्होंने टेबल टेनिस से खेल के क्षेत्र में कदम रखा। उन्होंने खेल के प्रति अपने रुझान को पहचाना और रिटायरमेंट के बाद इसे गंभीरता से अपनाया।
मेहनत और अभ्यास से बनाई पहचान
शालिनी ने बिना किसी पेशेवर कोचिंग के टेबल टेनिस खेलना सीखा। उन्होंने लगन और आत्मविश्वास के दम पर हुनर को निखारा। धीरे-धीरे उन्होंने स्थानीय प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। उनकी मेहनत, समर्पण रंग लाई और उन्होंने खेलो मास्टर्स जैसी प्रतियोगिताओं में चैंपियन बनी। साल 2020 में हुई टेबल टेनिस (कर्मचारी) राष्ट्रीय खेल-कूद प्रतियोगिता में एकल वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया। 2022 में हुई मास्टर्स टेबल टेनिस चैंपियनशिप में दूसरा स्थान पाया। दिल्ली में हुई खेलो मास्टर्स प्रतियोगिता में भी स्वर्ण पदक जीता। बैंकॉक में हुई एशिया पेसिफिक वेटरन टेबल टेनिस चैंपियनशिप में भी प्रतिभाग किया। हाल ही में वह इंदौर में आयोजित हुई नेशनल टेबल टेनिस वेटरन चैंपियनशिप में खेलकर आई हैं।
सीखने की कोई उम्र नहीं होती
शालिनी का मानना है कि जीवन में कुछ भी नया सीखने की कोई उम्र नहीं होती। कहा कि लोग सोचते हैं कि उम्र बढ़ने के बाद कुछ नया सीखना संभव नहीं होता, लेकिन ऐसा नहीं है। रिटायरमेंट के बाद समय का सही उपयोग करना बहुत जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि टेबल टेनिस ने उन्हें फिट, सक्रिय बनाने के साथ-साथ एक नई पहचान भी दी। संवाद