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जानलेवा हुआ प्रदूषण, सेना के सात घोड़ों की मौत, 40 की हालत नाजुक

Mon, 03 Dec 2018 06:44 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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बरेली में घोड़ा बटालियन रोड पर वाहनों का शोर और प्रदूषण सेना के घोड़ों पर काफी भारी पड़ रहा है। पिछले डेढ़ महीने में ही यहां सात घोड़ों की मौत हो चुकी है और गंभीर हालत में पहुंचे 40 घोड़ों का इलाज चल रहा है।
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सैन्य क्षेत्र 883 एटी बटालियन से गुजरने वाले जो चार रास्ते आम पब्लिक के लिए खोले गए हैं, उनमें सबसे ज्यादा ट्रैफिक घोड़ा बटालियन रोड से ही गुजरता है।
सेना के मुताबिक दिन भर में इस रोड से 6 हजार से अधिक वाहन यहां से गुजरते हैं।

सड़क से 20 मीटर की दूरी पर अस्तबल है, जहां 24 घंटे वाहनों की आवाजाही से घोड़ों की नींद पर असर पड़ रहा है। इससे चिड़चिड़े हुए घोड़े न ठीक से एक्सरसाइज कर रहे हैं न ही उनकी ट्रेनिंग हो पा रही है।
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खाना और पानी कम लेने से उनकी सेहत लगातार गिर रही है। सैन्य अफसरों का कहना है कि युद्ध के दौरान दुर्गम क्षेत्रों में जहां गाड़ियों का पहुंचना संभव नहीं, वहां घोड़े बेहद उपयोगी होते हैं। जरूरत पर 883 एटी बटालियन से घोड़ों को सीमा पर भेजा जाता है। 
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सैन्य अफसरों के मुताबिक  883 एटी बटालियन में जर्मनी की स्टार डस्ट नस्ल के घोड़े हैं जिन्हें जिसे थॉरो भी कहा जाता है। इन्हें शांत माहौल ही पसंद है। ये ऊंचाई पर चढ़ने में सक्षम होते हैं। उनकी इस उच्चकोटि की क्षमता को ‘पराक्रम’ में तब्दील करने के लिए एक ‘जवान’ की तरह प्रशिक्षित करना जरूरी है ताकि वह किसी भी परिस्थिति में अटल और अडिग बने रहें।  

जर्मनी की स्टार डस्ट नस्ल के हैं ये घोड़े
सैन्य अफसरों के मुताबिक सेना को सबसे मजबूत और तेज रफ्तार घोड़े चाहिए। 883 एटी बटालियन में जर्मनी की स्टार डस्ट नस्ल के घोड़े हैं जिन्हें जिसे थॉरो भी कहा जाता है। इन्हें शांत माहौल ही पसंद है। ये ऊंचाई पर चढ़ने में सक्षम होते हैं। उनकी इस उच्चकोटि की क्षमता को ‘पराक्रम’ में तब्दील करने के लिए एक ‘जवान’ की तरह प्रशिक्षित करना जरूरी है ताकि वह किसी भी परिस्थिति में अटल और अडिग बने रहें।  
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लगातार ट्रैफिक की वजह से घोड़ों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ना तय है। शोर और प्रदूषण से तनाव बढ़ने पर वह चिड़चिड़े और आक्रामक हो सकते हैं। तनाव की स्थिति पुरानी बीमारी को उभारती है। जिससे मौत होने की संभावना है। हालांकि घोड़ों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने के बाद ही उनकी मौत का कारण पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा। 
- डॉ. आरके सिंह, निदेशक, आईवीआरआई
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