बरेली। जिला अस्पताल का मंजर उस वक्त काफी दर्दनाक नजर आया, जब हादसे की सूचना मिलने के बाद खुर्शीद और समीरन के परिवार के लोग पहुंचे। परिवार के छह लोगों की मौत जैसी अनहोनी का सदमा उनके चेहरों पर झलक रहा था। किसी की आंखों में आंसू थे तो कोई बुरी तरह बिलख रहा था। जिला अस्पताल के स्टाफ और पुलिस के लिए अपनी लिखापढ़ी करने के लिए उन्हें संभालना मुश्किल हो गया।
शंखा पुल पर हादसे में मारे गए सातों लोगों के शव पुलिस ने जिला अस्पताल भिजवा दिए थे। अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों को बुलाकर लिखापढ़ी शुरू कराई गई। इसी दौरान मृतकों के परिवार वाले भी अस्पताल पहुंचे तो कोहराम शुरू हो गया। एक के बाद परिवार के सदस्यों के शव आते देख वे लोग बेकाबू होने लगे।
कुछ देर के लिए अस्पताल का पूरा माहौल काफी भावुक हो गया। अस्पताल के स्टाफ के साथ पुलिस कर्मी भी परिवार के लोगों को संभालने की कोशिश करते रहे। कुछ देर तक डॉक्टर और पुलिस कर्मी अपना काम भी नहीं कर सके। सभी लोगों की जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।
क्षतविक्षत शव देखकर दरोगा की हालत हुई खराब
तेज रफ्तार से एंबुलेंस और मिनी ट्रक में हुई आमने-सामने हुई टक्कर कितनी भीषण थी, इसकी गवाही शवों की हालत भी दे रही थी। लगभग सभी शव बुरी तरह क्षतविक्षत थे। शरीर के हर हिस्से पर चोट थी और हड्डियां टूटकर बाहर निकल आई थीं। पुलिस को इन शवों के पंचायतनामे में शरीर की चोटों का विवरण भरना था। पंचायत नामा भरने के दौरान एक दरोगा की भी हालत खराब हो गई। उन्होंने शव की ओर देखने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद मोर्चरी के एक कर्मचारी ने उनका सहयोग किया। उसके शरीर पर चोटों का विवरण बताने के बाद दरोगा ने और पंचायत नामा भरा।