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शिक्षकों को नौकरी से निकालने पर जांच में घिरे स्कूल

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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निगरानी समिति में मामला उठने के बाद गठित की गई जांच समिति
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जिले के करीब तीन हजार स्कूलों में जांच करेंगे खंड शिक्षा अधिकारी

बरेली। कोरोना काल के बीच तमाम निजी स्कूलों ने अपने यहां शिक्षकों की छंटनी कर दी है जबकि बच्चों से पूरी फीस वसूल की जा रही है। जिला निगरानी समिति में मामला उठने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है। बीएसए ने जांच की जिम्मेदारी सभी ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारी यानी बीईओ को सौंपी है। बीईओ रिपोर्ट तैयार करके देंगे कि किस स्कूल ने कितने शिक्षकों को कोरोना काल में नौकरी से निकाला है। यह रिपोर्ट बाद में सीडीओ को सौंपी जाएगी।
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निगरानी समिति की समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री संतोष कुमार गंगवार के सामने मामला उठा था कि कोरोना काल के नाम पर तमाम निजी स्कूलों ने अपने कई टीचरों को नौकरी से निकाल दिया है। इस बाद इस मामले में जांच कराने का फैसला हुआ था। बताते हैं बेसिक शिक्षा विभाग में करीब तीन हजार निजी स्कूलों का पंजीकरण हैं और इन सभी की जांच करनी है। जांच के बिंदु यह है कि स्कूलों में मार्च में कितने टीचरों की तैनाती थी और अब वहां कितने कार्यरत हैं। इसके अलावा ऐसे कितने स्कूल हैं, जो महामारी के दौर में बच्चों की फीस नहीं ले रहे हैं। अगर फीस पूरी ले रहे हैँ तो टीचरों को नौकरी से क्यों निकाला जा रहा है? बीएसए विनय कुमार को इन बिंदुओं की जांच करके रिपोर्ट सीडीओ चंद्रमोहन गर्ग को देनी है। चूंकि यह जांच काफी बड़े स्तर पर होनी है कि इसलिए इसकी जिम्मेदारी संबंधित ब्लॉक के बीईओ को सौँप दी गई है।

करीब तीन हजार स्कूल हैं। इसकी रिपोर्ट बीईओ से तैयार कराई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सीडीओ को दे देंगे। -विनय कुमार, बीएसए।

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