बरेली। रोडवेज बसों की मरम्मत में परिक्षेत्र के चारों डिपो के साथ रीजनल वर्कशॉप में भी घपला सामने आया है। इसके साथ ही जांच का दायरा भी बढ़ने लगा है। आउटसोर्सिंग पर काम करने वाली निजी फर्म की ओर से बसों में काम दर्शाकर फर्जी बिल बनते रहे और जिम्मेदार बिना जांच-पड़ताल इन्हें पास करते रहे। वर्कशॉप में नीलामी के लिए खड़ीं कंडम घोषित कई बसों में भी काम होना दर्शाकर बिल बना दिए गए। इन बसों पर पेंट भी कर दिया गया।
रोडवेज की बस संख्या एटी 9677 और बीटी 1151 काफी पहले कंडम घोषित हो चुकी हैं। नीलामी के लिए यह बसें वर्कशॉप में खड़ी करा दी गईं। इनमें एक बस में काम दर्शाते हुए 2,615 और दूसरी में 2,490 रुपये के बिल बना दिए गए। रीजनल वर्कशॉप के सीनियर फोरमैन ने इन बिलों को सत्यापित भी कर दिया।
ऐसी बसें भी हैं जो नीलामी के लिए खड़ी हैं, लेकिन उनके रंग-रोगन के बिल भी बनाए गए हैं। लीलैंड मॉडल की जिन बसों में कमानी नहीं होती उनमें कमानी के काम दर्शाकर भुगतान हो गया। बस संख्या 2597 में एक ही दिन में इंजन बदलने समेत 35 से ज्यादा काम दर्शाकर बिल पास करा लिया गया। रोडवेज के ही मैकेनिकल स्टाफ के एक जिम्मेदार ने बताया कि एक दिन में इतने काम संभव नहीं होते।
इतना ही नहीं कार्यदायी फर्म ने पिछले महीनों मिलीं बीएस-6 मॉडल की नई बसों में भी काम होना दर्शाकर बिल बना दिए, जबकि इन अत्याधुनिक बसों में सर्विस समेत अन्य कार्यों की जिम्मेदारी अभी बसों की आपूर्ति करने वाली कंपनी की ही है। एक के बाद एक गड़बड़ियां सामने आने के बाद अधिकारी भी सफाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि जो गलत बिल थे उनका भुगतान ही नहीं किया गया।
जांच की जा रही है। मुख्यालय को भी सूचना भेजी गई है। किसी गलत बिल का भुगतान नहीं किया गया है। संबंधित फर्म का दो बार भुगतान भी रोका जा चुका है। नीलामी संबंधी बसों से काम के पुर्जे आदि खोले गए थे। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। -धनजीराम, सेवा प्रबंधक
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