वेतन भुगतान में भी कर दिया खेल
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के सत्यापन, तकनीकी योग्यता और वेतन भुगतान में भी अनियमितताएं मिलीं। जांच में 6.41 लाख रुपये का भुगतान संदिग्ध पाया गया। इस रकम की वसूली की संस्तुति की गई है। ठेकेदार द्वारा कर्मचारियों का 5.78 लाख रुपये का ईपीएफ जमा न करने का मामला सामने आया। हालांकि, यह राशि बाद में नगर पालिका के खाते में जमा करा दी गई, लेकिन कर्मचारियों को इसका लाभ दिलाने के लिए कोई कार्रवाई न होने पर तत्कालीन ईओ और मौजूदा चेयरमैन सैयद आबिद अली को जिम्मेदार माना गया। जांच में यह सामने आया कि पूर्व के कार्यकाल में सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में चेयरमैन आबिद अली ने 13.96 लाख रुपये नगर पालिका में जमा कराए थे। इससे भी घोटाले की पुष्टि हुई।
बसपा से लोकसभा चुनाव लड़ा, मौलाना तौकीर से रही नजदीकी
आंवला नगर पालिका के चेयरमैन सैयद आबिद अली कई पार्टियों में दखल और अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। आबिद ने वर्ष 2012 में मौलाना तौकीर की पार्टी आईएमसी से चेयरमैन का चुनाव लड़ा और जीते। हालांकि सपा के प्रत्याशी को हराने की वजह से उन्हें शपथ लेना भी मुश्किल हो गया और कुछ समय बाद उन्होंने सपा का दामन थामकर राह आसान कर ली। वर्ष 2017 में वह सपा से चेयरमैन का चुनाव लड़े तो भाजपा के संजीव सक्सेना से हार गए।
वर्ष 2023 में आबिद ने सपा से फिर चुनाव लड़ा और संजीव को हरा दिया। वर्ष 2024 में आबिद ने बसपा से आंवला लोकसभा सीट का टिकट हासिल कर लिया। इस पर सपा प्रत्याशी नीरज मौर्य के समर्थकों ने उन्हें भाजपा प्रत्याशी तत्कालीन सांसद धर्मेंद्र कश्यप की बी टीम बताकर कटाक्ष किया। आबिद का वह वीडियो वायरल होने लगा, जब उन्होंने आंवला रेलवे स्टेशन के सौंदर्यीकरण पर धर्मेंद्र कश्यप की तारीफों के पुल बांधे थे। नतीजा, आबिद चुनाव हार गए।
मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी ने बताया कि नगर पालिका परिषद आंवला में टीएसी जांच की रिपोर्ट में 32.50 लाख रुपये की हेराफेरी पाई गई। दोषियों से इसकी वसूली की जाएगी। आगे की कार्रवाई के लिए पत्रावली प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग को भेज दी है।