बरेली। थाना बिथरी चैनपुर के पदारथपुर गांव के बुजुर्ग मसीत खां करीब साढ़े चार महीने बाद सऊदी अरब की जेल से रिहा हो गए। वह हज यात्रा पर गए थे और नशीली गोलियाें के साथ उन्हें एयरपोर्ट पर ही पकड़ लिया गया था। सऊदी अरब सरकार ने क्रेन हादसे के बाद छोटे अपराधों में बंद कैदियों को माफी देकर रिहा किया है। हालांकि हजूर के रोजे को चूमने की तमन्ना लेकर गए मसीत हज तो नहीं कर पाए लेकिन उन्हें अब सऊदी में रह रहे रिश्तेदारों ने उमरा कराकर भेजने का फैसला किया है। दस दिनों के बाद वह बरेली लौट आएंगे। परिवार में मसीत की रिहाई होने से खुशियों का माहौल है।
23 अगस्त को मसीत खां को सऊदी अरब एयरपोर्ट पर नशीली गोलियां ले जाने के आरोप में वहां की पुलिस ने पकड़कर गेस्ट हाउस में नजरबंद कर दिया था। उनकी बुजुर्ग पत्नी साबरा बेगम भी साथ में ही थीं। कस्बा ठिरिया निजावत खां के मोहल्ला तालाब में रहने वाले उनके साले के बेटे अकबर खां ने सऊदी अरब में रहने वाले अपने भाई अब्दुल सईद को देने के लिए एक पैकेट दिया था, जिसमें वह नशीली गोलियां थीं। परिवार वालों के दबाव बनाने पर अकबर का भाई अब्दुल सईद एयरपोर्ट के अफसरों के पास जाकर अपना जुर्म कुबूल कर लिया था। सईद ने कहा था कि मसीत की रिहाई करके उसे जेल भेज दिया जाए। उसने नशीली गोलियां खाने के लिए मंगाई थीं, लेकिन बात नहीं बन पाई थी। सऊदी अरब पुलिस ने मसीत को जेल भेजकर उनकी पत्नी साबरा को हज करने की इजाजत दे दी थी। मसीत के साथ सऊदी अरब पुलिस ने 86 हज यात्री तस्करी के आरोप में पकड़े थे। बाद में उन सभी को वहां की सरक ार ने हज करने की इजाजत भी दे दी थी, लेकिन मसीत और उनके दस साथियों ने खुद को बेगुनाह बताकर हज करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि हमारी रिहाई की जाए, लेकिन उनकी किसी ने एक नहीं सुनी। सऊदी अरब सरकार ने क्रेन हादसे में लोगों की मौत होने के बाद रहमदिली दिखाते हुए मसीत खां समेत तमाम मुल्कों के कैदियों को रिहा कर दिया। मसीत खां फिलहाल सऊदी अरब में मैकेनिक का काम करने वाले शराफत और अफसर के कमरे में ठहरे हुए हैं। शराफत और उनके साथियों ने मसीत खां को उमरा कराने का फैसला लिया है।
साबरा तो चार अक्तूबर को लौट आईं थी
-मसीत की पत्नी साबरा तो हज करने के बाद चार अक्तूबर को मायूस होकर घर लौट आई थीं। मसीत की रिहाई होने की सूचना मिलते ही साबरा के चेहरे की खुशी देखते ही बन रही है। मसीत के बेटे हसनैन का कहना है कि अल्लाह ने हमारी सुन ली। हमारे वालिद बेगुनाह थे, उन्हें इंसाफ मिला है। पदारथपुर के विसारत खां का कहना है कि अधिकारियों से मुलाकात के बाद तो यह लगता था कि मसीत खां की रिहाई होना ही मुश्किल है, लेकिन यह कुदरत का ही करिश्मा है।