वॉलीबाल में लड़कियों की टीम के कारण रुहेलखंड विश्वविद्यालय को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी, अनफिट होने के कारण पूरी टीम को रद्द कर दिया गया था, अब यही हश्र लड़कों की खो-खो टीम का हुआ। दो दिन पहले ही चुनी गई टीम विश्वविद्यालय के मैदान पर फिटनेस के मानकों पर धराशायी हो गई। इस बार कुलपति ने खुद पूरी टीम को निरस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि टीम फिट होगी तभी अंतर विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिता के लिए भेजी जाएगी।
खो-खो की जोनल प्रतियोगिता 26 से 29 सितंबर तक देशभक्ति यूनिवर्सिटी जिला फतेहगढ़ साहिब मंडी गोविंदगढ़ पंजाब में होनी है। इसमें रुहेलखंड विश्वविद्यालय की टीम जानी थी। टीम के चयन के लिए बुधवार को बिजनौर के एक कॉलेज में अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिता हुई। विवि की चयन समिति ने प्रदर्शन के आधार पर बारह खिलाड़ी चुने इसमें चार बिजनौर, कुछ बरेली और मुरादाबाद व अन्य जिलों के थे। टीम को शुक्रवार को भेजा जाना था। गुरुवार को टीम का फिटनेस टेस्ट हुआ तो दो खिलाड़ी ही 60 फीसदी फिट निकले जबकि बाकी खिलाड़ी 40 फीसदी तक भी नहीं पहुंचे पाए। कई खिलाड़ी तो 50 मीटर और छह सौ मीटर की दौड़ भी पूरी नहीं कर पाए और टेस्ट शुरू होते ही लड़खड़ाकर मैदान पर गिर गए। इस बारे में क्रीड़ा सचिव प्रोफेसर एके जेटली ने कुलपति को सूचित किया और हालात बताए। कुलपति ने खिलाड़ी की स्थिति देखते हुए साफ कह दिया कि बाहर विश्वविद्यालय का नाम खराब करने से अच्छा है टीम ही न भेजी जाए।
यह भी देख रहे, किस टीम से होगा मुकाबला
पिछली टीमें कमजोर फिटनेस के कारण इसलिए नहीं भेजी गईं कि उनका मुकाबला मजबूत टीम के साथ पड़ रहा था। ऐसी टीम भेजकर बुरी तरह हारना तय था। खो-खो में देखा जाएगा कि विवि का मुकाबला किस टीम से हो रहा है। अगर कमजोर टीम के साथ मुकाबला होगा तो टीम पर एक बार विचार किया जा सकता है।
एक टीम भेजने में खर्च होते हैं 70 से 80 हजार
विश्वविद्यालय टीम भेजने में अपना खर्चा भी देख रहा है। विश्वविद्यालय अच्छा खासा खर्चा करके ऐसी टीम को नहीं भेजना चाहता तो बाहर नाक कटाके आए। एक टीम पर रहना, खाना, आना जाना मिलाकर करीब 70 से 80 हजार रुपये खर्च होते हैं।
अगर खेलना है तो विवि कैंपस में करो तैयारी
क्रीड़ा सचिव ने साफ कह दिया कि जिन खिलाड़ियों को वाकई खेलना है तो वह विश्वविद्यालय कैंपस में तैयारी कर सकता है। ऐेसे खिलाड़ियों को अच्छा प्रशिक्षण दिया जाएगा और एआईयू की ओपन प्रतियोगिता के लिए भेजा जाएगा।
कॉलेजों में नहीं हो रहा प्रशिक्षण
सभी कॉलेज एडमिशन प्रक्रिया में फंसे हैं। नए छात्र भी कॉलेज में अभी नहीं जा पा रहे हैं ऐसे में खिलाड़ी चुनना बड़ी चुनौती है। खिलाड़ी सिर्फ खानापूरी करके प्रतियोगिताएं करा रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन भी मान रहा है कि कॉलेजों में प्रशिक्षण नहीं हो पा रहा है।
वर्जन
टीम के दो खिलाड़ी ही 60 फीसदी फिट निकले। जब टीम ही फिट नहीं तो उनको भेजने से क्या फायदा। फिर भी एक बार कुलपति से बात की जाएगी।
-प्रोफेसर एके जेटली, क्रीड़ा सचिव