बरेली। किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने की योजना कमीशनबाजी में उलझ गई है। गनीमत रही कि 80 हजार के भुगतान के बाद ही मामला सार्वजनिक हो गया। 81.16 लाख रुपये घपला-घोटाला होने से बच गए। अब वस्तु विशेषज्ञ मुनेंद्र कुमार सैनी ने भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। पहली तारीख पर शनिवार को तत्कालीन प्रभारी उप निदेशक और उनके सहयोगी कोर्ट में पेश भी हो चुके हैं।
उप निदेशक कृषि अभिनंदन सिंह के निलंबन बाद उप निदेशक भूमि संरक्षण नीरजा सिंह को अतिरिक्त प्रभार मिला था। नीरजा सिंह ने महीने भर बाद ही इसमें असमर्थता जता दी थी। फिर उप निदेशक (कृषि रक्षा) अमर पाल सिंह को अतिरिक्त चार्ज दिया गया था। उन्होंने दो-ढाई महीने अतिरिक्त चार्ज संभाला। इसी बीच मुनेंद्र ने उन पर राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन में एडवांस में 20 फीसदी कमीशन मांगने का आरोप लगा दिया। इसके बाद वह दिसंबर 2025 में अवकाश पर चले गए थे। जनवरी में हिमांशु पांडेय ने उप निदेशक कृषि का चार्ज संभाला, लेकिन मुनेंद्र तत्कालीन प्रभारी उप निदेशक कृषि अमर पाल के विरुद्ध जंग जारी रखे हैं। अब उनकी तरफ से अमर पाल और उनके सहयोगी कर्मी सुनील कुमार के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में दाखिल वाद पर सुनवाई शुरू हो गई है।
मनीष की शिकायत पर जांच ठंडी
अमर पाल के विरुद्ध मुख्यमंत्री से भी शिकायत हुई थी। 26 नवंबर को फतेहगंज पश्चिमी के गांव सतुईया के मनीष कुमार शर्मा की शिकायत पर शासन ने कृषि निदेशक को जांच और कार्रवाई के आदेश दिए थे, पर अब तक कोई असर नहीं हुआ है।
योजना फेल
प्राकृतिक खेती मिशन दिसंबर 2024 से जिले में प्रभावी है। कमीशनबाजी और अधिकारियों-कर्मियों के आपसी विवाद की वजह से अब तक किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है।
वर्जन
योजना में 81.96 लाख रुपये आए थे। इसमें 80 हजार रुपये का भुगतान हुआ है। यह भुगतान प्रभारी उप निदेशक अमर पाल के समय का है या इससे पहले का, यह जांच में ही साफ होगा। अब किसानों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने की प्रक्रिया भी बदल गई है। निदेशालय में पेमेंट सिस्टम तैयार किया जा रहा है। - हिमांशु पांडेय, जांच अधिकारी/उप निदेशक कृषि