वैदिक काल की वास्तुकला को समाहित करते हुए द्वारों की संरचना प्रस्तावित की गई है। प्रमुख सचिव ने इसके लिए वास्तुविद की सराहना की है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी बृजपाल सिंह ने बताया कि प्रमुख सचिव ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। शासनादेश जारी होने पर टेंडर निकाले जाएंगे। फर्म का चयन कर डीपीआर के अनुरूप काम कराया जाएगा।
आठ द्वार बनेंगे, तुलसी मठ में होगी श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला
अलखनाथ, मढ़ीनाथ, तपेश्वनाथ, त्रिबटीनाथ, वनखंडीनाथ, धोपेश्वरनाथ, पशुपतिनाथ मंदिर व तुलसी मठ में द्वार बनेंगे। बड़ाबाग हनुमान मंदिर के पास रामलीला मैदान पर 1000 की क्षमता का कांवड़ विश्राम स्थल स्थल बनेगा। यह करीब 1600 वर्ग फुट का शेड होगा। इसमें एक मंच भी रहेगा। जहां यह कांवड़ स्थल बनना है, वहां हर साल रामलीला भी होती है। इससे रामलीला के वक्त भी दर्शकों को सहूलियत होगी। तुलसी मठ में 12 कमरे की धर्मशाला बनेगी। एक कमरे चार श्रद्धालु ठहर सकेंगे।