बरेली। रुहेलखंड क्षेत्र की आर्द्र भूमियों में पक्षियों का समृद्ध बसेरा है। फरीदपुर रेंज स्थित महाराणा प्रताप वेटलैंड में नॉब बिल्ड डक, ब्लैक हेडेड आइबिस, बैंगनी बगुला, कॉमन ग्रीनशंक सहित पक्षियों की 34 अनोखी प्रजातियां देखी गई हैं। बरेली कॉलेज के जंतु विज्ञान विभाग के प्रो. राजेंद्र सिंह की देखरेख में जिले के ही छात्र अमित कुमार सिंह के अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है।
आर्द्र भूमियों की पक्षी विविधता और संरक्षण रणनीतियां विषय पर दस माह से चल रहे इस अध्ययन में पाया गया कि यह वेटलैंड स्वयं में एक पूरा इको सिस्टम है। यहां पक्षियों का कलरव इस वेटलैंड की अच्छी सेहत का भी संकेत दे रहा है। प्रो. राजेंद्र सिंह ने बताया कि वातावरण प्रदूषित होने के कारण पक्षियों की संख्या घट रही है। सुरक्षित ठिकाने की तलाश में वे हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं। ऐसे में महाराणा प्रताप वेटलैंट में पक्षियों का यह कलरव सुखद है। संवाद
खतरे में पक्षियों का संसार
दुनियाभर में पक्षियों की कई प्रजातियां खतरे में हैं। शहरीकरण और प्रदूषण की वजह से उनका प्राकृतिक आवास खत्म हो रहा है। कीटनाशक और अन्य रसायन उन्हें बीमार कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन उनके प्रवास के पैटर्न को बदल रहा है। शिकार और अवैध व्यापार भी बड़ा खतरा है। यह शोध पक्षियों के लिए आशा की किरण है। यह इस बात पर भी जोर देता है कि वेटलैंड्स का संरक्षण कितना जरूरी है? इसे पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। इस वेटलैंड का गहन अध्ययन भविष्य की संरक्षण रणनीतियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
वर्जन
पक्षियों का हमारे पर्यावरण में अहम रोल है। परागण और बीज प्रकीर्णन के साथ ही वे कीट नियंत्रण में भी मदद करते हैं। गिद्ध आदि पक्षी मरे हुए जानवरों को खाकर पर्यावरण की सफाई करते हैं और बीमारियां फैलने से रोकते हैं। उनके मल से मिट्टी को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। - प्रो. राजेंद्र सिंह