रुहेलखंड और बरेली डिपो के बेड़े में 50 से ज्यादा ऐसी खटारा बसें शामिल हैं, जो कब, कहां धोखा दे जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता। किसी में खिड़की के शीशे गायब हैं तो किसी में सीटों को बुरा हाल है। इंजन भी बेदम हो चुके हैं। इसे बावजूद इनसे सवारियां ढोई जा रही हैं। इन कंडम बसों के चलते कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है लेकिन अफसर कमाई के चक्कर में यात्रियों की जान जोखिम में डालने से नहीं चूक रहे।
रोडवेज के बरेली क्षेत्र में लगभग छह सौ बसें हैं। इनमें 50 ऐसी खटारा बसें हैं, जिन्हें चलाने के लिए ड्राइवर भी मना करते हैं लेकिन बसों की कमी के चलते इन्हें चलाया जा रहा है। इनमें से 20 बसें तो अपनी उम्र भी पूरी कर चुकी हैं। रोडवेज में 14 लाख किलोमीटर चलाने के बाद बस को कंडम घोषित करने का नियम है लेकिन ये बसें 16-17 लाख किलोमीटर चलने के बाद भी सड़कों पर दौड़ाई जा रही हैं। दो दर्जन से ज्यादा बसों की बॉडी गल चुकी है। इनके इंजन भी कमजोर हो चुके हैं। इसके कारण ये बसें कहीं भी रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। बरेली क्षेत्र में इन दिनों बसों का अभाव है। हाल ही में 15 बसों की नीलामी भी हो चुकी है। नई बसों को आना था लेकिन वे नहीं मिलीं। इस कारण क्षेत्र के सभी डिपो में बसों की संख्या कम हो गई है।