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कई ट्रेनें रद्द होने के साथ ही रामपुर के उपचुनाव में लगी है रोडवेज बसें

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बरेली। शहर से होकर गुजरने वाले हजारों यात्रियों का सफर कुछ दिनों से काफी कठिन हो गया है। जंक्शन पर न ट्रेनें और न रोडवेज स्टेशनों पर बसें। सफर के बीच भीषण गर्मी में स्टेशन और बस अड्डों पर रात काटनी पड़ रही है। संकट इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि मालगाड़ियों से कोयला ढोने के लिए तमाम यात्री ट्रेनें कई दिनों से रद्द हैं। उधर, 60 से ज्यादा बसें भी रामपुर में लोकसभा उपचुनाव में भेज दी गई हैं।
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रामपुर में लोकसभा का उपचुनाव 23 जून को होना है। पोलिंग पार्टी और पुलिस फोर्स को चुनाव ड्यूटी पर ले जाने के लिए बरेली डिपो की 25, रुहेलखंड डिपो की 30 और पीलीभीत डिपो की पांच बसों समेत 60 बसें भेजी गई हैं। इस वजह से कई रूटों पर बसों की भारी कमी हो गई है। उधर, यात्री ट्रेनों की भी कई दिनों से भारी कमी है। रोडवेज की 60 बसे उपचुनाव में लगने का असर इस तरह देखने को नहीं मिलता। मालगाड़ियों से कोयला ढोने के अलावा कई ट्रेनें गोंडा यार्ड में चल रहे काम की वजह से भी रद्द की गई हैं।
नतीजा यह है कि ट्रेन न मिलने पर जंक्शन से बस स्टेशन और बस स्टेशनों पर बस न होने की वजह से जंक्शन के बीच भटक रहे हैं। भीषण गर्मी में इन यात्रियों की दुर्गति देखने लायक है। तमाम यात्रियों को जंक्शन के सर्कुलेटिंग एरिया और बस अड्डों पर रात बितानी पड़ रही है। इक्कादुक्का बस मिलने पर उसमें सवार होने की मारामारी भी इस कदर है कि झगड़ों की नौबत आ रही है।
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नतीजा यह है कि याजिसका असर सीधे तौर पर सेटेलाइट के साथ ही जंक्शन पर ही देखने को मिल रहा है। यात्रियों की भीड़ बस न मिलने के कारण जंक्शन की ओर जा रही है। जबकी जंक्शन पर भी यात्रियों को ट्रेनें नहीं मिल रही है। शनिवार रात को भी ऐसा ही मंजर देखने को मिला है। जंक्शन के सर्कुलेटिंग एरिया, टिकट विंडो के साथ ही प्लेटफार्म पर परेशान यात्रियों ने डेरा डाल रखा था। जो थके होने के कारण ट्रेन के इंतजार में जमीन पर ही सोने का मजबूर हो गए। जंक्शन पर अंद से लेकर बाहर तक यात्रियों की भीड़ जमीन पर लेटी हुई सो रही थी। जबकी यह ही हालत सेटेलाइट बस अड्डो की थी। जहां पर बसे उपलब्ध नहीं थी और यात्री परेशान थे। सेटेलाइट पर भी यात्री जमीन पर सोने को मजबूर थे। हालांकि रोडवेज अधिकारी लगातार पर्याप्त बसें होने की बात कह रहे हैं।
दर्जनों भर से अधिक ट्रेनें पहले से चल रही निरस्त
मालगाड़ियों के माध्यम से कोयले की आपूर्ति सही तरह से चलाने के कारण दर्जन भर से अधिक ट्रेनें पहले से निरस्त चल रही है। जिसकी वजह से ही यात्रियों को परेशानी हो रही है। वहीं अगर ट्रेनें निरस्त नहीं होती तो 60 बसो की कमी का असर यात्रियों पर इतना नहीं दिखता।
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