सामाजिक और धार्मिक रूढ़ियों में जकड़े समाज को संदेश दिया है नैनीताल के जयदेव वर्मा ने। उन्होंने संकल्प लिया था कि मरने के बाद अपना शरीर एसआरएमएस मेडिकल इंस्टीट्यूट को पढ़ाई के लिए दान करेंगे। शनिवार को उनके बेटे अनिरुद्ध वर्मा ने उनके इस संकल्प को पूरा किया।
कहते हैं कि बुजुर्ग पुरानी सोच के होते हैं, उनकी सोच बदलना मुश्किल है। लेकिन नैनीताल के भवाली श्यामखेत के रहने वाले 83 वर्षीय जयदेव वर्मा ने इस बात को नकार दिया। 23 मार्च को उनका निधन एसआरएमएस मेडिकल इंस्टीट्यूट में हुआ। होली के चलते कानूनी कागज पूरे नहीं हो सके। तब तक शव मोर्चरी में रहा। शनिवार को दान की पुष्टि हुई। जयदेव वर्मा जब ठीक थे तभी उन्होंने अपना शरीर दान करने का निश्चय कर लिया था। एसआरएमएस के एमएस डॉ. हरिओम अग्रवाल ने बताया कि 18 मार्च को वे भर्ती हुए थे। तभी उनकी स्थिति गंभीर थी।