- सीएआरआई में आठ विश्वविद्यालयों के प्रतिभागियों का प्रशिक्षण शुरू
बरेली। क्रिस्पर कैस तकनीकी से शोधार्थियों को जीनोम एडिटिंग सिखाने के लिए सोमवार से केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) में कार्यशाला शुरू हो गई है। इस कार्यशाला में छह राज्यों के आठ विश्वविद्यालय के शोधार्थी भाग ले रहे हैं। 10 दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में जीनोम एडिटिंग से जुड़ी तमाम जानकारियां दी जाएगी।
प्रशिक्षण के पहले दिन कैडराड के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. ऋषेंद्र वर्मा ने बताया कि क्रिस्पर कैस- 9, जीन-संपादन की एक अहम तकनीक है। उससे डीएनए में सटीक और कुशल तरीके से संशोधन किया जा सकता है। यह तकनीकी आनुवंशिक सूचना वाले डीएनए के सिरे को हटाने और जोड़ने में प्रयोग की जाती है। इसका प्रयोग जीन के कार्यव्यवहार, कृषि, चिकित्सा संबंधी कई बीमारियों के इलाज और रोकथाम में किया जा सकता है। कैडराड के संयुक्त निदेशक डॉ. सोहिनी डे ने कहा कि जीनोम एडिटिंग से पोल्ट्री स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए टीके बनाने में कर सकते हैं। सीएआरआई निदेशक डॉ. अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि प्रशिक्षण का विषय पोल्ट्री में स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ाने के लिए जीनोम एडिटिंग है। पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. गौतम कोल्लुरी ने प्रशिक्षण के बारे में संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रतिभागियों को प्रशिक्षण का उद्देश्य बताया।
उन्नत तकनीकी से रूबरू होने का मिलेगा मौका
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को फ्लो साइटोमेट्री, आरएनए सीक्वेंसिंग विश्लेषण, आर सॉफ्टवेयर, एसपीएसएस की हैंडलिंग जैसी अन्य उन्नत तकनीकों के बारे में जानने का मौका मिलेगा। व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सिम्मी तोमर, डॉ. चंद्रदेव, डॉ. एमपी सागर, डॉ. मतीन अंसारी, डॉ. जयदीप रोकड़े, तकनीकी अधिकारी जयदीप अरोड़ा आदि थे। अमर उजाला ब्यूरो