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भौमावस्या: मौन योग से मिटेंगे कष्ट

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बरेली। भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप माने जाने वाले मार्गशीर्ष (अगहन) माह की मौनी अमावस्या (भौमावस्या) जातकों के लिए बेहद शुभ फलदायी रहेगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 26 नवंबर यानी मंगलवार का संयोग होने से मौन का महाव्रत धारण कर पवित्र नदी में स्नान करने वाले साधक को मुनिपद की प्राप्ति होती है।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के मुताबिक मंगलवार को भौमावस्या के साथ ही दत्तात्रेय जयंती भी मनाई जाएगी। रात 8.35 बजे से भौमावस्या का मान सूर्योदय तक रहेगा। दान, श्राद्ध व व्रत समेत तंत्र सिद्धि के लिए भी भौमावस्या विशेष मानी गई है। मान्यता है कि इस दिन किए गए उपाय जल्दी ही शुभ फल प्रदान करते हैं। इसमें माता लक्ष्मी की मूर्ति के सामने 11 कौड़ी, 7 गोमती चक्र और महालक्ष्मी यंत्र अर्पित कर 108 बार ‘श्री महालक्ष्म्यै नम:’ जप, आटे की गोलियां बनाकर तालाब या नदी की मछलियों को खिलाने से धन संबंधी समस्या खत्म होती है। वहीं, मंगलवार का दिन होने से हनुमान जी का पाठ करने और उन्हें लड्डू का भोग लगाने से व्यापार या व्यवसाय की समस्या से छुटकारा मिलता है।

पूजन विधि
अमावस्या की रात नहाकर पीले रंग के कपड़े पहनकर उत्तर दिशा की ओर मुख कर ऊन या कुश के आसन पर बैठें। थाल में केसर का स्वास्तिक या ऊं बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। फिर दिव्य शंख थाली में स्थापित कर उसमें चावल को केसर में रंगकर डालें। घी का दीपक जलाकर ‘सिद्धि बुद्धि प्रदे देवि भुक्ति मुक्ति प्रदायिनी। मंत्र पुते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते’ का 11 बार कमल गट्टे की माला से जप करें। मंत्रजप के बाद पूजन सामग्री को नदी या तालाब में विसर्जित करनी चाहिए।
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