समुद्र मंथन के समय अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे धन्वंतरि इसलिए बर्तन खरीदने की है परंपरा
बरेली। धनतेरस पर देवी लक्ष्मी की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल दो घंटे 24 मिनट का रहेगा, जो शाम 5:45 बजे से 8:17 बजे तक तक रहेगा।
पंडित राजेंद्र तिवारी ने बताया कि धनतेरस पर सबसे पहले मिट्टी का हाथी और भगवान धन्वंतरि की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद चांदी या तांबे की आचमनी के जल से आचमन कर भगवान गणेश का पूजन करें। हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें। मान्यता है कि इस दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जनक धन्वंतरि देव समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए धनतेरस को धन्वंतरि जयंती भी कहा जाता है। धन्वंतरि देव हाथ में अमृत भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसी वजह से धनतेरस के दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। धनतेरस से ही पंचपर्व की शुरुआत हो जाती है। धनतेरस पर पीतल और चांदी के बर्तन खरीदने की परंपरा है। मान्यता है कि बर्तन खरीदने से धन वृद्धि होती है। इस दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार और आंगन में दीये जलाने चाहिए। धनतेरस के दिन शाम के समय यम देव के निमित्त दीपदान किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मृत्यु के देवता यमराज के भय से मुक्ति मिलती है।
धनतेरस पर खरीदारी के पांच शुभ मुहूर्त
काल-सुबह 7:33 बजे खाद्यान्न खरीदने के लिए।
शुभ-सुबह 9:13 का समय गाड़ी, मशीन, कपड़ा और शेयर खरीदने के लिए।
चर-दोपहर 2:12 बजे का समय गाड़ी और गैजेट खरीदने के लिए।
लाभ-दोपहर 3:51 का समय लाभ कमाने वाली मशीन और कम्प्यूटर खरीदने के लिए।
अमृत-शाम 5:31 बजे का समय जेवर और बर्तन खरीदने के लिए शुभ।
प्रदोष काल-7:11 बजे का समय घरेलू सामान खरीदने के लिए शुभ।