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शहर में 25 साल पहले शुरू हुई थी दुर्गा पूजा

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शहर में 25 साल पहले शुरू हुई थी दुर्गा पूजा - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। कहते हैं कि अष्टमी के दिन देवी दुर्गा, गणेश जी, सरस्वती और लक्ष्मी जी के साथ मायके आई थीं। चार दिन रहने के बाद वह पति भगवान शंकर के यहां पहुंचीं। इसी उपलक्ष्य में दुर्गा पूजा मनाकर विसर्जन किया जाता है।
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मढ़ीनाथ निवासी वयोवृद्ध ताप्ती चटर्जी बताती हैं कि शहर में दुर्गा पूजा की शुरूआत उनके चाचा प्रतुल चंद गांगुली और उनके साथी डॉ. एसी चटर्जी, एमएम मुखर्जी और डॉ. एमपी गुहा ने कराई थी। बाद में रामपुर गार्डन, दुर्गाबाड़ी, रेलवे मनोरंजन सदन, चौपुला, बीआई बाजार, इज्जतनगर रेलवे रिजर्वेशन आफिस के सामने स्थित दादू का मंदिर और एयरफोर्स गेट इसकी शुुरुआत हुई। बंगाली समाज का दायरा बढ़ने के साथ ही इसकी भव्यता बढ़ी।
यह भी मान्यता है कि जो लोग दुर्गा मां के पंडालों में पहुंचकर आशीर्वाद पाते हैं उनका पूरा वर्ष अच्छा बीतता है। उन्होंने बताया कि पौराणिक काल के अनुसार चार दिन बाद दुर्गा मां की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा करने के बाद रामगंगा नदी में सिरा दिया जाता है। उनके पुत्र ध्रुव चटर्जी बताते हैं कि भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करते समय 108 कमल के फूलों का सेतु बनाया था। एक फूल कम होने पर भगवान राम ने अपनी एक आंख चढ़ाने का फैसला किया। उसी समय दुर्गा जी प्रकट हुईं और विजयी होने का आशीर्वाद दिया। उन्होंने बताया कि दुर्गा मां की मूर्ति बनाने का काम तेजी पर चल रहा है।
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