बरेली। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाने वाली गणेश चतुर्थी अबकी बार जातकों के लिए विशेष फलदायी रहेगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक गणेश चतुर्थी पर दो योग समेत चतुर्र्गही संयोग भी बनेगा, जो विधि विधान से पूजन करने पर कई गुना शुभ फल प्रदान करने वाला होगा। दो सितंबर को पंडालों में विराजने वाले गणपति का विसर्जन परंपरानुसार 8 सितंबर से शुरू होकर 12 सितंबर तक होगा।
ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा ने बताया कि बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता श्री गणेश की चतुर्थी पर अबकी बार ग्रह, नक्षत्रों की शुभ स्थिति से शुक्ल और रवियोग बनेगा। वहीं, सिंह राशि में चतुर्ग्रही योग भी बन रहा है। यानी सिंह राशि में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र एक साथ रहेंगे। ग्रहों के इस शुभ संयोग में गणेश जी की स्थापना से सुख/समृद्धि और शांति मिलेगी। 2 सितंबर सोमवार की शुरुआत हस्त नक्षत्र में होगी और गणेश जी की स्थापना चित्रा नक्षत्र में की जाएगी। मंगल के इस नक्षत्र में चंद्रमा होने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। चित्रा नक्षत्र और चतुर्थी तिथि का संयोग 2 सितंबर को सुबह लगभग 8 बजे से शुरू होकर पूरे दिन रहेगा।
गणेश जी की स्थापना का शुभ मुहूर्त : ज्योतिषाचार्य पं. शर्मा ने बताया कि गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल में अभिजित मुहूर्त के संयोग में गणेश भगवान की मूर्ति की स्थापना करना शुभ रहेगा। पंचांग के अनुसार अभिजित मुहूर्त सुबह 11.55 से दोपहर 12.40 तक रहेगा। दिन भर शुभ संयोग होने से किसी भी शुभ लग्न या चौघड़िया मुहूर्त में मूर्ति स्थापना कर सकते हैं। चित्रा नक्षत्र और चतुर्थी का संयोग सुबह लगभग 8 बजे से शुरू होगा।