बरेली। शासन ने बरेली को हादसों में शून्य मृत्युदर वाला जिला बनाने की मुहिम छेड़ रखी है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत घायलों के कैशलेस इलाज की व्यवस्था की गई है। योजना से 30 निजी अस्पताल संबद्ध हैं, लेकिन इनका प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। इससे घायलों को कैशलेस इलाज नहीं मिल पा रहा है। हादसे के बाद सूचीबद्ध अस्पतालों की तलाश मरीज की जान पर भारी भी पड़ सकती है।
फिलहाल, तीन माह में आए 56 आवेदनों में से 36 का भुगतान हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान जिले में करीब 130 हादसे हुए। इनमें सौ से ज्यादा लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराने की जरूरत पड़ी। ज्यादातर निजी अस्पतालों के योजना से संबद्ध नहीं होने की वजह से घायलों को अपने खर्च पर इलाज कराना पड़ रहा है।
बीते दिनों पीलीभीत से मजदूरी के लिए दूसरे जिले में जा रहे वाहन में सवार चार लोग हादसे में घायल हो गए थे। इलाज के लिए पुलिस उन्हें बारादरी स्थित एक निजी अस्पताल ले गई। कैशलेस इलाज के लिए कहा तो संचालक ने पीएम राहत योजना की जानकारी से इन्कार कर दिया।
स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करने पर अस्पताल का नाम सूची में शामिल नहीं होने की जानकारी दन्गई। मामला एसपी ट्रैफिक तक पहुंचा तो उन्होंने सीएमओ से संपर्क कर निजी अस्पताल को सूचीबद्ध कराकर कैशलेस इलाज शुरू कराया। इलाज के बाद चारों स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो गए हैं। ये मामला सिर्फ बानगी भर है। निजी अस्पताल संचालक योजना से अनजान थे। पुलिस विभाग की मुस्तैदी से कैशलेस इलाज मुमकिन हुआ।
नोडल अधिकारी डॉ. पवन कपाही के मुताबिक, अधिकतर गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हाईवे पर होती हैं। संबद्ध 30 निजी अस्पतालों में से ज्यादातर पीलीभीत बाइपास, बदायूं रोड, नैनीताल रोड और मिनी बाइपास पर संचालित हैं। कुछ अस्पताल शहर के अंदर हैं, जो विभाग समेत आयुष्मान योजना में पंजीकृत हैं। यहां 24 घंटे एक-एक सर्जन, ऑर्थोपेडिक, एनेस्थेटिक सेवाएं देते हैं। हाईवे स्थित सीएचसी में प्राथमिक इलाज होता है।
एंबुलेंस संचालकों को भी जानकारी नहीं
सड़क हादसे में घायल को घंटेभर में बेहतर चिकित्सा सुविधा मिले, इसके लिए निजी अस्पताल चिह्नित हैं। बताते हैं कि इसे धता बताते हुए निजी एंबुलेंस संचालक घायलों को मनमुताबिक अस्पताल पहुंचा रहे हैं। हालांकि, निजी एंबुलेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष वीके द्विवेदी का कहना है कि उन्हें संबद्ध अस्पताल की सूची या भर्ती संबंधी कोई दिशा-निर्देश पुलिस, परिवहन या स्वास्थ्य विभाग से नहीं मिले हैं। अगर आदेश होगा तो अनुपालन कराएंगे।
यह है प्रक्रिया
सड़क हादसे में घायल व्यक्ति की सूचना संबंधित थाने को देनी होगी। अगर घायल को किसी व्यक्ति ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया है तो अस्पताल इसकी सूचना पुलिस को देंगे। पुलिस सत्यापन में घटना की पुष्टि के बाद विक्टिम आईडी और अस्पताल पेशेंट आईडी जेनरेट करेंगे। यह आईरेड पोर्टल पर अपडेट होगा। 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। इससे अधिक खर्च का भुगतान घायल के परिजन करेंगे।
वर्जन
सड़क दुर्घटना पर अंकुश लगाने और घायल को गोल्डन ऑवर में चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का प्रयास है। पीएम राहत योजना के तहत पंजीकृत निजी अस्पतालों में घायलों का कैशलेस इलाज हो सकता है। और भी अस्पतालों को सूची में शामिल कराने का प्रयास है। - अकमल खान, एसपी ट्रैफिक