बरेली। शहर में बिजली कटौती और फॉल्ट के कारण घंटों आपूर्ति बाधित होने की समस्या से जल्द राहत मिलेगी। बिजली निगम ने नोएडा और लखनऊ की तर्ज पर शहर की बिजली व्यवस्था को रिंग नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए 12 रिंग मेन यूनिट (आरएमयू) लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
पहले चरण में औद्योगिक क्षेत्र और शहर के आठ ऐसे इलाकों को चिह्नित किया गया है, जहां बिजली कटौती और फॉल्ट की शिकायतें सबसे अधिक रहती हैं। इस कार्ययोजना पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अभी तक प्रदेश में लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद में आरएमयू की व्यवस्था लागू की गई है। आरएमयू का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी इलाके को बिजली देने वाली भूमिगत या ओवरहेड लाइन में फाॅल्ट आने पर पूरे क्षेत्र की आपूर्ति लंबे समय तक बंद नहीं रखनी पड़ेगी। बिजली एक फीडर से क्षेत्र में पहुंचती रहेगी। यदि उस लाइन में फाॅल्ट आता है तो खराब हिस्से को अलग कर दूसरे फीडर से बिजली की सप्लाई चालू की जा सकेगी।बिजली निगम ने गर्मी के दौरान ओवरलोडिंग, लाइन फॉल्ट और ट्रिपिंग से बार-बार बिजली बाधित होने वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। औद्योगिक क्षेत्र को भी योजना में शामिल किया गया है, ताकि उद्योगों को बिजली आपूर्ति में होने वाले व्यवधान को कम किया जा सके।
फॉल्ट पर लगेगा अंकुश
वर्तमान व्यवस्था में एक फीडर पर फॉल्ट आने के बाद उससे जुड़े बड़े क्षेत्र की बिजली बंद करनी पड़ती है। इसके बाद कर्मचारी मौके पर पहुंचकर फॉल्ट तलाशते हैं और मरम्मत के बाद आपूर्ति बहाल करते हैं। इसमें कई बार घंटों लग जाते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, योजना का उद्देश्य केवल बिजली कटौती कम करना नहीं, बल्कि फॉल्ट के बाद आपूर्ति बहाल करने में लगने वाले समय को घटाना भी है। आरएमयू के जरिये नेटवर्क को अधिक लचीला बनाया जाएगा।
वर्जन
लखनऊ और नोएडा की तर्ज पर शहर में सर्वाधिक कटौती वाले आठ उपकेंद्रों पर आरएमयू के तहत आपूर्ति की व्यवस्था आरंभ करने की तैयारी है। वहीं प्रथम चरण में औद्योगिक क्षेत्र में भी 4 आरएमयू यूनिट लगाई जाएंगी। जिससे काफी हद तक आपूर्ति संबंधी समस्या से सहूलियत मिलेगी। - ललित कुमार, अधीक्षण अभियंता शहर