दिवाली से पहले रिजेक्ट नमकीन यानी पशुआहार के नाम पर नीलामी में ली गई नमकीन को प्रशासन टीम ने पकडा था, लेकिन उसका लैब में परीक्षण नहीं हो पाने से कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। बताया जाता है कि यह रिजेक्ट नमकीन दिल्ली से बरेली में मिलावट के लिए ही लाई जा रही थी। पूछताछ में मिलावट करने वाले कारखाने और कारोबारी का नाम भी खुला था। इसके बावजूद एफएसडीए विभाग सक्रिय नहीं हो पाया था। ब्रह्मपुरा स्थित कारखाने पर छापा मारा गया था और वहां करीब ढाई क्विंटल से ज्यादा घटिया नमकीन नष्ट कराने का दावा किया गया था। विभाग ने इसे गुडवर्क दिखाकर मामला रफादफा कर दिया था।
हर दिन 100 टन की खपत
बाजार सूत्रों ने बताया कि जिले में करीब सौ टन नमकीन का रोजाना कारोबार होता है। होली पर ज्यादा मांग होने से लोकल स्तर पर निर्माण तेजी से हो रहा है। रोजाना करीब 25 टन रिजेक्ट घटिया नमकीन बाजार में खपाई जा रही है। सूत्रों ने बताया कि प्रतिदिन एक करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार गांव-मोहल्लों तक फैला है।
रिजेक्ट नमकीन भी हुई महंगी
तीन-चार साल पहले ब्रांडेड कंपनियां रिजेक्ट नमकीन यानी पशुआहार दस रुपये किलो की दर से नीलाम कर देती थीं, लेकिन मिलावटखोरों के खेल और प्रतिस्पर्धा ने इसकी कीमत तीन तक गुना बढ़ा दी। त्योहार विशेष और ज्यादा मांग होने पर रिजेक्ट नमकीन की नीलामी कीमतें भी बढ़ जाती हैं। बताया जाता है कि होली को देखते हुए रिजेक्ट नमकीन 35 से 37 रुपये किलो तक सप्लाई हो रही है। इसलिए मिलावटखोरों ने लोकल ब्रांड और लूज नमकीन पांच से दस रुपये प्रति किलो महंगी कर दी है।
सस्ती नमकीन के लिए सस्ते सामान का बाजार भी
रिजेक्ट माल और लोकलमेड नमकीन में मिलावटखोर नमक, खटाई, मिर्च आदि भी घटिया ही मिलाते हैं। लोकल और मिलावटी नमकीन में इस्तेमाल होने वाले मसालों आदि का बाजार भी अलग है। कारोबारी पांच रुपये प्रति किलो के हिसाब से खास नमक खरीदते हैं, जबकि खुले बाजार में ऐसा नमक नहीं मिलता है। मिर्च पाउडर भी रिजेक्ट श्रेणी यानी सेकंड मिर्च मिलाते हैं। खटास लाने के लिए टाटरी आदि मिलाकर स्वादिष्ट बना देते हैं।
मिलावटखोरी रोकने के लिए विभाग सक्रिय रहता है। नमकीन में पशुआहार के नाम पर रिजेक्ट उत्पाद मिलाकर नया ब्रांड बनाने की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी।
- धर्मराज मिश्रा, जिला अभिहित अधिकारी