बरेली। शहर की प्रमुख सड़कों से सफेद पट्टी, कैट आई और रिफ्लेक्टर गायब हैं। कोहरे ने भी दस्तक दे दी है। ऐसे में रात के सफर के दौरान हादसे का अंदेशा बना हुआ है। लगातार हो रहे हादसों के बावजूद जिम्मेदार इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
स्मार्ट सिटी की सड़कों पर 180 करोड़ रुपये खर्च हुए, पर दो साल से भी कम अवधि में तमाम कैट आई टूट गईं या गायब हो गईं। चौकी चौराहे से सेटेलाइट तक बेतरतीब डिवाइडर पर पेंट भी नहीं लगा है। बरेली-बीसलपुर मार्ग, बरेली-बदायूं मार्ग, बरेली-नैनीताल मार्ग, बरेली-पीलीभीत मार्ग के कई हिस्सों में सफेद पट्टी नजर नहीं आती। श्यामगंज पुल के दोनों ओर शुरुआत में ही गहरे गड्ढे और कम ऊंचाई के टूटे हुए डिवाइडर हैं। यहां कोई रिफ्लेक्टर और साइन बोर्ड नहीं हैं। रात नौ बजे के बाद वन वे खत्म होने के बाद भारी वाहन भी इस रूट से गुजरते हैं।
वर्जन
जहां भी रिफ्लेक्टर नहीं लगे हैं या टूट गए हैं, उन्हें लगवाया जाएगा। साइन बोर्ड आदि की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। सड़कों पर सफेद पट्टी भी करवाई जाएगी। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
जेब्रा क्रॉसिंग, सफेद पट्टी की जिम्मेदारी सड़क निर्माण करने वाली एजेंसियों की है। सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में इस पर चर्चा होती है। कई स्थानों पर काम हुए हैं। जो रह गए हैं, उन्हें कराएंगे। - अकमल खां, एसपी ट्रैफिक
सड़क निर्माण के समय सफेद पट्टी बनवाई जाती है। उसे दोबारा कराने का कोई बजट नहीं मिलता। इस बारे में बजट मांग कर काम कराएंगे। - सत्येंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
खाई में जाते-जाते बची कार
कार से बदायूं होते हुए आगरा जाते समय अचानक सफेद पट्टी गायब हुई तो हमारी कार खाई में जाते-जाते बची। कोहरे के बाद भी सफेद पट्टी नहीं कराई जा रही है। - राजीव सिन्हा, ट्रैवल एजेंट, सौ फुटा रोड
मैं परिवार के साथ आंवला जा रहा था। रास्ते में सफेद पट्टी गायब होने की वजह से सफर मुश्किल हो गया था। कोहरा शुरू होने से पहले सड़कों पर सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित किए जाएं। - अभय कुमार, व्यापारी, माधौबाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो