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भूमाफिया पर बार-बार जिक्र करो, फिर जिक्र की फिक्र करो

Sun, 31 Dec 2017 02:24 AM IST
बरेली।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद जिले में भूमाफिया पर कार्रवाई करने के नाम पर अजब तरह की कवायद चल रही है। छह महीने गुजरने के बाद भी प्रशासन के अफसर टॉप- 10 सूची को फाइनल नहीं कर पाए। शासन को भेजी गई सूची में महलों में रहने वाले भूमाफिया साफ बच जाने और झोपड़ियों में रहने वाले कब्जेदारों के नाम शामिल कर दिए जाने पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। डीएम के निर्देश पर टॉप-10 सूची को अपडेट करने की दोबारा कवायद शुरू हुई है, लेकिन अभी भी निशाना देहात के लोगों पर ही है।
सूबे में योगी सरकार बनते ही एंटी भूमाफिया अभियान चलाने का एलान हुआ। बरेली में इसके बाद भूमाफिया को चिह्नित करने का काम शुरू हुआ तो प्रशासन के अफसर काफी समय तक कागजी घोड़े दौड़ाने में जुटे रहे। आठ दिसंबर को शासन ने हर जिले से टॉप-10 भूमाफिया की सूची मांगी तो अफसरों कुछ गंभीर हुए, लेकिन शासन को सूची भेजने में खेल करने से फिर भी बाज नहीं आए। शहर में नदी-नहरों की बेशकीमती जमीनों पर कब्जा कर आलीशान कॉलोनियां बसाने वालों को बचाकर सरकारी जमीनों पर कब्जे करने के अपेक्षाकृत छोटे-मोटे मामले तलाशकर टॉप-10 भूमाफिया की सूची शासन को भेज दी। यह सूची बनाने में इस कदर खेल हुआ कि कई झोपड़ी में रहने वाले भी इसमें फंस गए। नदी-नहरों की अरबों की जमीन पर कब्जा करने वालों की लंबी फेहरिस्त प्रशासन से पास पहले से थी, लेकिन उनमें से एक का भी नाम प्रशासन की सूची में नहीं आया।
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सरकारी जमीनों के बड़े कब्जेदारों के साफ बच जाने के कारण टॉप-10 सूची पर पहले ही दिन से सवाल खड़े होने लगे। अमर उजाला में इस खेल का खुलासा होने के बाद आईएएस वीक से लौटे डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने टॉप-10 भूमाफिया की सूूची के झोपड़ी वालों के नाम निकालने के निर्देश जारी किए, लेकिन इसके बाद अब फिर कागजी घोड़े दौड़ाने की शुरुआत कर दी गई है। डीएम ने कहा था कि अब नए सिरे से टॉप-10 भूमाफिया की सूची बनेगी। नदी और नहर पर कब्जा करने वाले शहर के बिल्डरों को भी सूची में शामिल किया जाएगा। उन्होंने उपजिलाधिकारियों के साथ निकायों, बीडीए, सिंचाई विभाग और अन्य विभागों को भी सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों की सूची बनाकर भेजने के निर्देश दिए थे। सूचियां आईं भी, मगर आंवला से तीन मामूली कब्जेदारों की सूूची डीएम को भेज दी गई। इसी तरह फरीदपुर से 27 कब्जेदारों की सूची आई। आंवला तहसील के रोहतापुर के जरनैल सिंह और उसके दो सगे भाई टॉप-10 की सूची में एक नंबर के भूमाफिया बना दिए गए। 

टॉप-10 में शामिल कर दिया, कितनी जमीन कब्जाई यह जिक्र तक नहीं
मीरगंज तहसील से रामगंगा किनारे झोपड़ी डालकर रहने वाले विजेंद्र सिंह का नाम भूमाफिया की सूूची में दो नंबर पर है। विजेंद्र सिंह सिंह ने रामगंगा किनारे रेत की कितनी जमीन कब्जा की थी, उसके रकबे तक की सूची में जानकारी नहीं दी गई। सिर्फ इतना बता दिया गया है कि उसने 58.95 लाख की मालियत पर क ब्जा कर रखा था। इसी तरह आंवला के जरनैल सिंह और उसके दो भाइयों पर पट्टे की जमीन पर कब्जे का आरोप है। 
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पुलिस ने बनाई भूमाफिया की अलग सूची
शासन को प्रशासन की ओर से टॉप-10 भूमाफिया की सूची भेजे हुए 15 दिन से अधिक हो गए, लेकिन अभी तक भूमाफिया की सूची प्रशासन अपडेट नहीं कर पाया है। जिला भूमि रिकार्ड क्लर्क के पास सूचियां लगातार आ रही हैं, नगर निगम ने भी दस कब्जेदारों की सूची भेजी है। पुलिस ने भूमाफिया की अलग सूची बना ली है। पुलिस की सूची में इज्जतनगर थाने में जिन सात लोगों के खिलाफ गैंगस्टर की एफआईआर दर्ज है, उनके अलावा कालोनाइजर पिता-पुत्र के नाम भी शामिल हैं। भूमाफिया के नाम पर ऐसी खिचड़ी सी पकाई जा रही है कि सब उलझ गए हैं।

 
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