जिले में पूरी परीक्षा के दौरान पहली बार नकल का एक भी केस नहीं
बरेली। सीसीटीवी कैमरों और वॉयस रिकॉर्डर की सख्त निगरानी में यूपी बोर्ड परीक्षा कराने का नतीजा यह हुआ कि इस बार 45 फीसदी से ज्यादा परीक्षार्थियों ने एक-दो पेपर देने के बाद ही परीक्षा छोड़ दी। परीक्षा खत्म होने के बाद तैयार किए गए इस रिकॉर्ड पर यह आंकड़ा देखकर विभागीय अफसर भी हैरान हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा में जिले में इस बार एक भी नकलची न पकडे़ जाने का भी रिकॉर्ड बना है। पिछले साल परीक्षा छोड़ने वाले परीक्षार्थियों की संख्या 15 फीसदी ही थी।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 1997 में कल्याण सिंह की सरकार के बाद यह पहला मौका था जब यूपी बोर्ड की परीक्षा को साफसुथरे ढंग से कराने के लिए काफी सख्त इंतजाम किए गए थे। कल्याण सिंह के कार्यकाल में 1997 से 1999 के बीच तीन साल तक परीक्षाएं इतनी कड़ी निगरानी में हुई थीं कि तीनों साल परीक्षाफल 20 फीसदी से भी कम रहा था। हालांकि परीक्षा छोड़ने वाले परीक्षार्थियों की संख्या इतनी ज्यादा नहीं थी।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में इस बार 96913 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हुए थे। इनमें से अलग-अलग विषयों में 38,434 परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ी है। गणित, विज्ञान, हिंदी, इंग्लिश की परीक्षा में सर्वाधिक छात्र अनुपस्थित रहे हैं। आसान विषयों में भी अनुपस्थिति का औसत आंकड़ा 20 फीसद तक रहा। जिले इस बार यह भी रिकॉर्ड बना कि जिले के 131 परीक्षा केंद्रों पर पूरी परीक्षा के दौरान नकल का एक भी मामला नहीं पकड़ा गया।
बोर्ड परीक्षा को नकल विहीन बनाने के लिए शासनादेश के तहत सारी कवायदें की गईं। पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के साथ स्टाफ ने भी नकलविहीन परीक्षा कराने में पूरा सहयोग किया है। इसी से परीक्षा की शुचिका बरकरार रही। डॉ. प्रदीप कुमार, संयुक्त शिक्षा निदेशक