फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार घंटे में 103 मिमी बारिश: बरेली में टूटा रिकॉर्ड, मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता; राहत के नहीं आसार

Sun, 17 Sep 2023 06:36 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली में फिर से मौसम का मिजाज बिगड़ गया है। रविवार को सुबह मूसलाधार बारिश हुई। इसके बाद गरज चमक के साथ रिमझिम बारिश का सिलसिला दोपहर 12 बजे तक जारी रहा। तेज हवा और बारिश से धान की फसल खेतों में गिर गई। 
विज्ञापन
खेत में गिरी धान की फसल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बरेली में शनिवार को हल्की बारिश के बाद देर रात घिरे घने बादलों ने रिकॉर्ड बारिश की। करीब चार घंटे में 103 मिमी बारिश से शहर तरबतर हो गया। बारिश से अधिकतम तापमान चार डिग्री लुढ़ककर 28.4 डिग्री सेल्सियस पहुंचा। आगे भी अनुकूल माहौल बनने पर बारिश की उम्मीद है। वहीं, बारिश से धान की फसल को नुकसान की आशंका है। बारिश में धान की फसल खेतों में गिर गई है। 

विज्ञापन


मौसम विभाग (इंडियन मीटरोलॉजी डिपार्टमेंट) की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के मुताबिक साल 2011 में ही 24 घंटे में 123.2 मिमी बारिश हुई थी। इसके बाद साल 2012 से 2022 तक 24 घंटे में महज 52 से 90 मिमी के बीच ही बारिश दर्ज हुई। अब फिर अचानक मौसम का मिजाज बदला। रविवार सुबह करीब पांच बजे शुरू हुई तेज बारिश की आवाज से लोगों की नींद टूट गई। 

ये भी पढ़ें- यूपी: गांव में आरएसएस की शाखा का विरोध, स्वयंसेवक को पीटा, बसपा कार्यकर्ताओं ने उखाड़ फेंका ध्वज
विज्ञापन


सुबह करीब नौ बजे तक लगातार बारिश का सिलसिला जारी रहा। फिर कुछ देर बूंदाबांदी के बाद बारिश थमी। दोपहर एक बजे तक घने बादल मंडराते रहे। फिर आठ किमी. प्रति घंटे की गति से चली हवाओं ने बादलों को आगे बढ़ा दिया। आसमान साफ होने से दोपहर दो बजे के बाद हल्की धूप निकली।

शाम पांच बजे तक चटक धूप रही पर तापमान में हुई गिरावट से बेअसर रही। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ अतुल कुमार के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से चल रही पुरवा हवा से पहाड़ी इलाकों से सटे मैदानी इलाकों में बारिश हुई। रुहेलखंड क्षेत्र पहाड़ से सटे होने की वजह से पूरे क्षेत्र में बारिश हावी रही। आगे भी दो दिन तक अनुकूल माहौल बने रहने पर हल्की, तेज बारिश की संभावना है।

24 घंटे में कब कितनी हुई बारिश

साल 2011 में 25 सितंबर को 123.2 मिमी., 2012 में 18 सितंबर को 90.8, 2013 में 26 सितंबर को 48.6, 2014 में 21 सितंबर को 38.9, 2015 में 21 सितंबर को 63.0, 2016 में 22 सितंबर को 71.0, 2017 में 22 सितंबर को 49.1, 2018 में 25 सितंबर को 55.4, 2019 में 22 सितंबर को 42.9, 2020 में 23 सितंबर को 52.0, साल 2021 में 24 सितंबर को 78.6, 2022 में 19 सितंबर को 88.1 मिमी. बारिश हुई।

विज्ञापन

खेतों में बिछी धान की फसल

कड़ी मेहनत से तैयार धान की फसल के लिए रविवार को हुई बारिश मुसीबत बन गई। नवाबगंज और शाही क्षेत्र में तेज हवा के साथ हुई बारिश से सैकड़ों एकड़ फसल खेतों में बिछ गई। पानी भरने से अब फसल सड़ने की आशंका है। जिन खेतों में बालियां निकल आईं हैं वहां दाना काला पड़ जाएगा।

ज्वार, बाजरा, सफेद तिल, उड़द की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। बारिश थमने के बाद दोपहर के समय किसान फसलें देखने पहुंचे। हालात देखकर उनके चेहरे मुरझा गए। किसान हरीश कुमार, कृष्णपाल, तेजपाल, कांताप्रसाद ने बताया कि बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान अगेती फसल को हुआ है। इन खेतों में बालियां निकल आईं थी। इस वजह से लाक की लंबाई भी ज्यादा थी। तेज हवा के साथ बारिश होने से पूरी फसल खेतों में बिछ गई। खेत में पानी भी भरा हुआ है। ऐसे में लाक सड़ जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें