बरेली। बच्चों को जन्मजात दोष से निजात दिलाने में आर्थिक तंगी अड़चन बनी तो राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) ने मदद का हाथ बढ़ाया। नौ माह में दिल में छेद, मोतियाबिंद समेत कटे होंठ-तालू और टेढ़े पंजे की चपेट में रहे 76 बच्चों की निशुल्क सर्जरी कराकर उनकी मुस्कान लौटाई।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल जन्मजात कटे होंठ-तालू के 20, टेढ़े पंजे के 51, दिल में छेद और मोतियाबिंद संबंधी दो-दो निशुल्क सर्जरी कराई गई हैं। नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. पवन कपाही के मुताबिक, जिले में आरबीएसके टीमें स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर जन्मजात दोषों की चपेट में रहे बच्चों को चिह्नित करती हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक की जांच में दोष की पुष्टि के बाद सीएमओ की ओर से संबद्ध निजी अस्पतालों में बच्चों की निशुल्क सर्जरी कराई जाती है। इलाज समेत आवाजाही का खर्च शासन की ओर से दिया जाता है। योजना की जानकारी न होने पर आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार बच्चों के इलाज से हाथ खड़े कर लेते हैं।
प्रोग्राम मैनेजर डॉ. पारस गुप्ता के मुताबिक, योजना के तहत जन्मजात दिल में छेद, कोक्लियर इंप्लांट, अंधापन, रेटिना विकार, कटे होंठ-तालू, क्लब फुट, हिप डिसप्लेसिया, फंगल इनफेक्शन, एक्जिमा, कान की समस्या, रिएक्टिव एयरवेज, दांतों से जुड़ी समस्या, एनीमिया, कुपोषण, थॉयराइड व अन्य दोषों का इलाज व सर्जरी कराई जाती है।
नवाबगंज के गांव कचनारी निवासी रामेश्वर दयाल के आठ माह के बेटे पंकज को जन्मजात हाइड्रोसिफिलिस (मस्तिष्क में पानी) की समस्या थी। संबंधित दोष की पुष्टि के बाद बच्चे की निशुल्क सर्जरी हुई। निजी अस्पताल में इसके इलाज में एक लाख रुपये खर्च होते।
मुड़िया नवी बक्श के नरोत्तम का नौ वर्षीय बेटा दिव्यांश जन्मजात दिल में छेद के दोष से पीड़ित था। परिजन आर्थिक तंगी की वजह से इलाज नहीं करा पा रहे थे। आरबीएसके के जरिये अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज में उसकी निशुल्क सर्जरी हुई। निजी अस्पताल में इसमें दो लाख रुपये खर्च होते।