बरेली। भारतीय खाद्य निगम से मिला घटिया गेहूं कोटेदाराें के माध्यम से खुले बाजार में पहुंच रहा है। टूटा और खराब गेहूं मुर्गी दाना और अन्य कार्यों में उपयोग किया जा रहा है। बाजार में इसकी कीमत गेहूं से ज्यादा है। इसलिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली का ज्यादातर खाद्यान्न काला बाजारी में आसानी से खप जाता है। उधर, निगम अफसरों ने डीएम नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया है।
पिछले चार माह यानी अक्तूबर से लेकर जनवरी तक खराब गेहूं राशन दुकानों पर पहुंचा है। राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) ने आपत्ति के बावजूद भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) पीलीभीत स्थित गोदामाें से खराब गेहूं उठा कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में खपा दिया। इन चार महीनों में चार लाख क्विंटल से ज्यादा खराब गेहूं उठाया गया है। धूल और मिट्टी मिला घटिया गेहूं राशन कार्ड धारकों ने पसंद नहीं किया, तो इसे खुले बाजार में पहुंचा दिया गया। यह घटिया टूटा गेहूं मुर्गी दाना आदि के रूप में इस्तेमाल होता है। कुछ साफ टूटा गेहूं फ्लोर मिलों पर पहुंचाया जाता है। इस कालाबाजारी में कोटेदार को कोई घाटा नहीं होता है। क्योंकि मुर्गी दाना बाजार में 15 से 17 रुपये प्रति किलो बिकता है और सामान्य साफ गेहूं 15 रुपये प्रति किलो उपलब्ध है। इस तरह विभागीय मिलीभगत से गरीबों का सस्ता गेहूं मुर्गियों के पेट में जा रहा है। संवाददाता द्वारा पड़ताल के बाद पता चला कि शहर के बाजारों में यह गेहूं खुलेआम बिक रहा है, हालांकि इसे बेचने वाले दुकानदार बहुत कम है।
‘एफसीआई और एसएफसी प्रबंधकों ने अभी तक नोटिस का उत्तर नहीं दिया है। अक्टूबर से जनवरी तक सप्लाई हुए घटिया गेहूं का ब्योरा मांगा गया है। गरीबों को मिलने वाला गेहूं मुर्गी दाना में बिक रहा है। इसकी जांच होगी। डीएम इस मामले में काफी गंभीर हैं।’
- केएल तिवारी, डीएसओ
कैसे पहुंच रहा है गेहूं बाजार तक
शहर में मुर्गी दाना गेहूं हर दुकानदार के पास उपलब्ध नहीं है। शाहदाना मार्केट में इक्का दुक्का दुकानदार ही हैं जो यह बेंच रहे हैं। एक दुकानदार तो यह बताता है कि वह ये गेहूं गोदामों से ही लाते हैं। कुछ लोग सीधे दुकानाें पर ही बेंच जाते हैं। इसके लिए पहले से बात करनी पड़ती है। हालांकि गोदाम और बेचने वालों का नाम दुकानदार नहीं बताते। दुकानदार हमेशा गंदा गेहूं की मांगते हैं, साफ और मोटा गेहूं मुर्गियां नहीं खाती। 18 रुपये किलोग्राम वाला मुर्गी दाना गेहूं अगर 30 किलो लेते हैं तो यह 16 रुपये में भी देने को तैयार हैं।
घटिया गेहूं से उपभोक्ता परेशान
बरेली। भारतीय और राज्य खाद्य निगम की लापरवाही गरीबाें को भारी पड़ रही है। घटिया गेहूं की सप्लाई उचित मूल्य के वितरण केंद्रों तक पहुंच गई है। कई वितरण केंद्रों पर तो उपभोक्ताआें ने गेहूं लेने से ही मना कर दिया है। मिट्टी और कंकड़ युक्त गेहूं काफी खराब है, जबकि कोटेदार घटिया गेहूं को लेकर चुप्पी साधे हैं।
भूड़ के कोटेदार किशन लाल ने बताया कि उनकी दुकान पर कुल 800 उपभोक्ताआें के कार्ड हैं। हर माह करीब 42 क्विंटल गेहूं मिलता है। बीते दो माह से खराब गेहूं की काफी शिकायत रही। उपभोक्ता भी परेशान रहे। भूड़ के ही कोटेदार अंकुर सक्सेना की दुकान में तो घटिया गेहूं की काफी शिकायतें आ रही हैं। उनका कहना है कि पिछले दो माह से अच्छा गेहूं नहीं आ रहा है। शहदाना निवासी 72 वर्षीय अशफाक बताते हैं कि उनके यहां आया घटिया गेहूं साफ करना मुश्किल है। गेहूं में मिट्टी आदि ज्यादा निकल रही है।