पिछले दो साल बनी थी बाढ़ की स्थिति
बीते दो साल तक अक्तूबर में पहाड़ों पर भारी बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ा था। साल 2021 में रामगंगा का जलस्तर 162.130 मीटर, साल 2022 में 160.940 मीटर रहा। रामगंगा से सटे क्षेत्र सूदनपुर, जितौर इसके आसपास के गांव में बाढ़ का आंशिक प्रकोप रहा था। जनजीवन प्रभावित हुआ था। करीब तीन सौ से ज्यादा गांवों में भी विषम परिस्थितियां थीं। हालांकि, जलप्रवाह से कोई जनहानि नहीं हुई थी।
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कार्यालय में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित
एसडीओ अमित किशोर के मुताबिक रामगंगा नदी का डिस्चार्ज 1,25,000 क्यूसेक से ज्यादा होने पर बाढ़ की स्थिति बन सकती है। बाढ़ खंड बरेली के कार्यालय में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिया गया है। जो 31 अक्तूबर 2023 तक 24 घंटे क्रियाशील रहेगा। कक्ष का हेल्पलाइन नंबर 0581-2511664 है। आंशिक बचाव के लिए दो लाख ईसी बैग, दो हजार एनआरसी और 50 सेट परक्यूपाईन रिजर्व कर ली गई हैं।
28 शरणालय बने, ठहरने खाने की व्यवस्था
बाढ़ की निगरानी के लिए जिले की सीमा की शुरुआत से अंत तक 50 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। पिछले साल तक चौकियों की संख्या 42 थी, अबकी बार आठ नई बाढ़ चौकी बनी हैं। बाढ़ की स्थिति में गांवों से विस्थापन की स्थिति में 28 शरणालय प्रस्तावित हैं। जहां विस्थापितों के लिए भोजन, ठहरने, दवा आदि व्यवस्थाएं रहेंगी। बताया कि अभी रामगंगा में तेज जल प्रवाह से कटान की कोई शिकायत नहीं मिली है।