बरेली। रामगंगा तट पर कार्तिक पूर्णिमा मेला के लिए चौबारी की चमक बढ़ गई है। दूर-दराज से आए व्यापारियों ने नखासा सजा लिया है तो घरेलू सामानों की दुकानें भी साजोसामान के साथ तैयार हैं। मनोरंजन के लिए मेले में झूले, सर्कस सज चुके हैं और लोगों की भीड़ भी बढ़ने लगी है।
रविवार को डीएम गौरव दयाल और एसएसपी धर्मवीर सिंह यादव ने पूजन करने के बाद रिबन काट कर मेले का उद्घाटन किया। उन्होंने मेले की व्यवस्थाएं भी देखीं। डीएम ने चौबारी मेले को लोक संस्कृतियों का संगम बताया। कहा, ये मेले लोगों के दिलों को जोड़ते हैं। इस दौरान एसडीएम सदर प्रशांत शर्मा और एसडीएम फरीदपुर कुंवर पंकज भी मौजूद रहे।
स्नान नए घाट पर
रविवार को एसडीएम और तहसीलदार ने रामगंगा तट पर प्रस्तावित नए घाट की माप कराई। ज्यादा गहराई होने पर अब दूसरा घाट बनवाने का निर्णय लिया गया है। नया घाट बांध के पिलर की तरफ बनाया जाएगा। वहीं श्रद्धालु रेलवे पुल के नीचे परंपरागत घाट पर नहीं जा सकेंगे। यह मार्ग बैरीकेडिंग कर रोक दिया जाएगा।
बैल लाने पर इंस्पेक्टर ने ठेकेदारों को चेताया
चौबारी मेले में बैलों की बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई है। फिर भी लोग बैल लेकर आए हैं। इंस्पेक्टर कैंट एसएन सिंह ने मेला स्थल पर चौबारी के प्रधान जयवीर सिंह को बैलों को न हटवाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। इस पर ठेकेदार छोटे सिंह गुस्सा गए। कहा, बैलों की बिक्री प्रतिबंधित है उन्हें लाना नहीं। अगर ठेकेदारों पर दबाव बनाया गया तो मेले का प्रबंध हम नहीं देख पाएंगे प्रशासन खुद ही मेला करा ले। प्रधान और ठेकेदार ने मेला प्रबंधक एसडीएम सदर प्रशांत शर्मा से पुलिस पर बेवजह दबाव बनाने की शिकायत भी की। एसडीएम ने उन्हें समझाबुझाकर मामला शांत किया। उद्घाटन के बाद ठेकेदारों ने डीएम से भी अपनी बात कही।
हजार से लाख में घोड़े
नखासे में कई व्यापारी राजस्थान से भी घोड़े लाए हैं। घोड़ा पालक मेले में अपने घोड़े बेचने पहुंचे हैं। बदायूं के राजेश छह घोड़ों को लेकर आए हैं। लाल रंग के एक घोड़े का नाम शेर बताते हुए कहा कि इसकी कीमत 17.5 लाख रुपये है। शाहजहांपुर के मलखान नुखरा घोड़ा लेकर आए हैं और महज 22 हजार मांग रहे हैं।
काली घोड़ी की नाल की मांग
नखासा में काली घोड़ी की नाल की डिमांड हो रही है। नाल लगाने वाले काले खां ने कहा लोग काले घोड़े की नाल खरीदने आ रहे हैं। जितने में बिक जाए उतने में बेच देते हैं। काले खां नखासा में लाए जाने वाले घोड़े-घोड़ियों के पैरों से पुरानी नाल निकालकर नई नाल ठोकने का काम करते हैं।
चाइना के घुंघरू भी
पशुओं के गले में पहनाने वाले चाइनीज घुंघरू मेले में पहली बार आए हैं। विक्रेता मतीन अहमद ने बताया जितने में पीतल के दस घुंघरू मिलते हैं उसके आधे में चाइनीज मिल जाते हैं। पशुपालक इन्हें पसंद कर रहे हैं।
चांदनी भी दौड़ेगी...
फरीदपुर इलाके के पचौमी भगवानपुर गांव से अपनी घोड़ी को लेकर आए बाबा हिमाचल गिरी ने तंबू बना लिया है। वह अपनी घोड़ी को घुड़दौड़ में दौड़ाएंगे। घोड़ी का नाम पूछने पर शर्माते हुए उसका नाम चांदनी बताया।