नहरों के लिए चाहिए 1029 हेक्टेयर जमीन व 1400 करोड़ रुपये
परियोजना के तहत नहरों के लिए 1029 हेक्टेयर जमीन चाहिए। जमीन के अधिग्रहण के लिए ही करीब 1400 करोड़ रुपये चाहिए। इसके अलावा नहरों को बनाने में भी करोड़ों रुपये खर्च होंगे। बैराज का अधूरा काम भी पूरा होना है। अधिकारियों का कहना है कि 31 मार्च को उम्मीद थी कि कुछ बजट आ जाएगा, लेकिन निराशा ही हाथ लगी।
37 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई के लिए बनी थी परियोजना
बदायूं का दातागंज क्षेत्र डार्क जोन में आता है। फसलों की सिंचाई के लिए यहां संकट खड़ा हो जाता है। क्षेत्र को डार्क जोन से निकालने के लिए व आस-पास के 37 हजार हेक्टेयर खेतों की सिंचाई के लिए यह परियोजना बनाई गई थी। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी स्थिति जस की तस है।
समय-समय पर लगते रहे भ्रष्टाचार के दाग
भाजपा सरकार ने पिछले पांच वर्षों में परियोजना के लिए कोई बजट जारी नहीं किया। इसके पीछे भ्रष्टाचार वजह बताई जा रही है। पिछली सरकार में बैराज बनाने के नाम पर खूब भ्रष्टाचार हुआ। बजट न देने के पीछे एक वजह यह भी बताई जा रही है। सरकार ने अगर इस मामले की जांच करा ली तो शुरू से अब तक इस परियोजना से जुड़े अफसरों के सामने मुसीबत खड़ी हो सकती है।
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता नरेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2019 से बैराज का काम रुका हुआ है। इसके लिए करीब 3,289 करोड़ का बजट चाहिए। हर साल जमीन के दाम बढ़ते हैं, इसलिए बजट भी बढ़ रहा है।