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बरेली से राज्यसभा का दोहरा दांव: श्रुति गंगवार और धर्मपाल सिंह बने प्रत्याशी, ओबीसी वोटबैंक पर भाजपा की नजर

Mon, 05 Oct 2026 03:52 PM IST
Mukesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने बरेली से श्रुति गंगवार और धर्मपाल सिंह को उम्मीदवार बनाया है। श्रुति गंगवार झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। धर्मपाल सिंह प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। 
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श्रुति गंगवार और धर्मपाल सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी कर रूहेलखंड और ब्रज क्षेत्र में बड़ा राजनीतिक दांव चला है। पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री व आठ बार के सांसद संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह को उच्च सदन (राज्यसभा) का प्रत्याशी बनाया है।

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बरेली की धरा से ताल्लुक रखने वाले इन दो प्रमुख ओबीसी चेहरों को आगे लाकर भाजपा ने रूहेलखंड से लेकर ब्रज तक कुर्मी और लोध वोट बैंक का अभेद्य सियासी दुर्ग तैयार करने की रणनीति बनाई है।
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यह भी पढ़ें- राज्यसभा चुनाव: भाजपा ने श्रुति गंगवार को बनाया प्रत्याशी, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की हैं बेटी

श्रुति गंगवार लंबे समय से समाज सेवा और संगठन के कार्यों से जुड़ी रही हैं। उनके पिता संतोष गंगवार बरेली से आठ बार सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वहीं, आंवला विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे धर्मपाल सिंह वर्तमान में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

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कार्यकर्ताओं में उत्साह 
पार्टी नेतृत्व द्वारा बरेली क्षेत्र से दो प्रमुख नेताओं को उच्च सदन भेजने के फैसले से रूहेलखंड और ब्रज क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में उत्साह है। दोनों प्रत्याशियों के नामांकन पत्र दाखिल करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

लोकसभा चुनाव में टिकट बदलने के बाद संतोष गंगवार को राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई और अब उनकी पुत्री श्रुति गंगवार को राज्यसभा भेजकर पार्टी ने पुराने व निष्ठावान कार्यकर्ताओं को मजबूत संदेश दिया है।

लोध समुदाय को साधा 
योगी सरकार में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह आंवला से पांच बार विधायक रह चुके हैं। ब्रज और पश्चिमांचल में लोध समुदाय के बीच उनकी गहरी पैठ को देखते हुए उन्हें राज्यसभा में उच्च कद दिया गया है।

इस फैसले का सीधा असर बरेली, बदायूं, एटा और कासगंज जिलों की नवाबगंज, आंवला, शेखूपुर, दातागंज, मारहरा और पटियाली जैसी एक दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों के समीकरणों पर पड़ेगा।
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