विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश होने से बाधिन कहीं छिपी रही, बाहर भी निकली तो पगचिह्न नहीं दिखे
फतेहगंज पश्चिमी। आखिरकार बाघिन के चल रहे रेस्क्यु में जिसे लेकर अफसर चिंतित थे वह हो ही गया। बारिश ने बाघिन को ट्रेंक्यूलाइज करने का ऑपरेशन बाधित कर दिया है। बारिश के चलते टीम को बाघिन की लोकेशन नहीं मिल सकी। शुक्रवार सुबह हुई बारिश में बाघिन के पगचिन्ह भी मिट गए। उधर, कैमरे में फुटेज भी नहीं मिली। अब अफसर शुक्रवार की रात में भी रेस्क्यु के लिए एक्सपर्ट की चार टीमें बनाकर उसे ट्रेंक्युलाइज करने की कोशिश करेंगे।
रबर फैक्ट्री के जंगल में बीते करीब चार माह से डेरा जमाए बाघिन लगातार अफसरों को छका रही है। पिछले तीन दिन से उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पूरे जंगल में विशेषज्ञों की टीम चार भागों में विभाजित होकर बाघिन को ट्रेंक्यूलाइज करने की कोशिश कर रही है, लेकिन वह सामने नहीं आ रही। बजाय इसके चारों जगह बांधे गए शिकार को भी वह निवाला नहीं बना रही है।
जानकारों के मुताबिक, अगर एक-दो दिन में बाघिन पकड़ में नहीं आई तो बारिश होने की वजह से रेस्क्यु भी प्रभावित हो सकता है। शुक्रवार सुबह अचानक बारिश होने से बाघिन के पगचिन्ह भी नहीं देखे जा सके। इतना ही नहीं जंगल में लगे कैमरे में भी उसकी फुटेज नहीं दिखी।
फैक्टरी की बिल्डिंग भी बन रही बाधा
मुख्य वन सरंक्षक ललित वर्मा के मुताबिक, रबर फैक्टरी के जंगल में घूम रही बाघिन को पकड़ने में देरी होने की एक वजह फैक्टरी की बिल्डिंग भी है। बाघिन बिल्डिंग में छिप जा रही है, जिसकी वजह से उसे ट्रेस करने में अड़चन आ रही है। इलाका अगर जंगल जैसा होता तो उसे ट्रेस करने में मुश्किल नहीं होती। एक सप्ताह पहले देहरादून से आई एक्सपर्ट की टीम मेहनत से लगी हुई हैं। बाघिन की लोकेशन कई जगह मिलने के कारण रबर प्लांट, कोयला प्लांट, डिस्टलरी प्लांट में एक्सपर्ट की चार टीम रात में बाघिन को टारगेट किए हुए हैं।