बरेली। नगर निगम के नए भवन की गुणवत्ता शुरुआत से ही सवालों के घेरे में हैं। इससे पहले भी दो बार सवाल उठे थे। राइट्स और पीडब्ल्यूडी की टीम से जांच भी कराई गई थी। तब अधिकारियों व अभियंताओं ने कंस्ट्रक्शन कंपनी के क्लीन चिट दे दी थी। बुधवार को छत व दीवारों से रिसाव होने और फाल्स सीलिंग गिरने के बाद पूर्व में हुई जांचों में मिलीभगत की बू भी आ रही है।
अब नगर आयुक्त ने जांच करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम के साथ दूसरी रिपोर्ट मांगी है। इसको वह मंडलायुक्त काे सौंपेंगे। पूर्व में हुई जांच में आईएएस रैंक के किसी अधिकारी को शामिल नहीं किया गया था। नगर निगम में चर्चा है कि इस बार आईएएस रैंक के अधिकारी मामले की जांच कर सकते हैं। ऐसा होने पर पूर्व में हुई जांच और भ्रष्टाचार की परतें भी खुल सकती हैं। चर्चा यह भी है कि नगर आयुक्त स्वयं भी इस मामले में जांच अधिकारी हो सकते हैं।
इसलिए चार साल में खराब हुई बिल्डिंग
नई बिल्डिंग की गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के चैंबर और अन्य जगह दीवारों पर लगाए गए मार्बल टूटकर गिर गए हैं। वे चार साल भी नहीं टिक सके। दूसरी मंजिल पर शौचालय में लगे पत्थर भी टूटने लगे हैं।
अर्थदंड से कुछ नहीं होगा, सख्ती जरूरी
अब तक तीन से चार बार में संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। वर्ष 2024 में 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया था। पूर्व में तैनात रहे नगर आयुक्त अभिषेक आनंद ने भी दाे से तीन लाख रुपये का अर्थदंड लगाया था। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने कहा कि 10-15 करोड़ का प्रोजेक्ट है। इसमें दो-तीन लाख का अर्थदंड लगाने से कुछ नहीं होगा। इसमें सख्त कार्रवाई की जरूरत है। समय पूरा होने के बाद भी काम अधूरा पड़ा है। संवाद