बरेली। अनुसूचित जाति की कृषि भूमि को डीएम की अनुमति के बिना सामान्य वर्ग की महिला ने खरीद लिया। अब एसडीएम कोर्ट ने 16 वर्ष पहले हुए 1246.891 वर्गमीटर भूमि के बैनामे को शून्य घोषित करते हुए लगभग दो करोड़ रुपये मूल्य की जमीन राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया है। तहसीलदार सदर और प्रभारी निरीक्षक सुभाषनगर को खातेदारों को बेदखल करने के निर्देश दिए हैं।
मामला सदर तहसील के गांव अटा कायस्थान का है। गाटा संख्या-251, रकबा 2.3730 हेक्टेयर भूमि पर भूमिधर रामभरोसे लाल समेत अन्य का नाम दर्ज था। इनमें से 1246.891 वर्गमीटर भूमि का बैनामा 19 जनवरी 2010 को रामभरोसे लाल ने गांव की साबरा बानो के पक्ष में कर दिया। रामभरोसे लाल अनुसूचित जाति के हैं, जबकि क्रेता सामान्य वर्ग की महिला है।
तहसीलदार सदर की 28 मई की रिपोर्ट के आधार पर राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए। सुनवाई के दौरान साबरा बानो ने दलील दी कि भूमि अर्धनगरीय क्षेत्र में है और लंबे समय से आबादी में शामिल होने के कारण उन्होंने इसे प्लॉट के रूप में खरीदा है, इसलिए अनुमति की आवश्यकता नहीं समझी।
हालांकि सुनवाई में स्पष्ट हुआ कि विवादित भूमि को कभी गैर-कृषक घोषित नहीं किया गया था, न ही बिक्री से पहले जिलाधिकारी की अनुमति ली गई थी। कोर्ट ने माना कि भूमि कृषि श्रेणी में है, जिस पर राजस्व संहिता के सभी प्रावधान लागू होते हैं। इसे नियमों का उल्लंघन कर कपटपूर्ण तरीके से बेचा गया। इसके आधार पर एसडीएम सदर कोर्ट ने 19 जनवरी 2010 के बैनामे को निरस्त करने का आदेश पारित कर दिया।