जेल से छूटने की नहीं थी उम्मीद
यौन उत्पीड़न और पॉक्सो एक्ट के केस में उम्रकैद की सजा पाने वाले कैदियों को अपील से पेरोल व रिहाई की गुंजाइश बेहद कम होती है। माना जा रहा है कि मुकेश भी यह बात मन ही मन मान बैठा था कि उसका जीवन जेल की कोठरी के भीतर ही खत्म हो जाएगा। जेल प्रशासन स्थानीय चिकित्सकों के साथ ही मानसिक अस्पताल के विशेष चिकित्सकों से उसका उपचार करवा रहा था।
वह बहकी हुई बातें करता था, हालांकि वह आत्महत्या कर लेगा, इस बारे में जेल प्रशासन ने भी कयास नहीं लगाया था। वरिष्ठ जेल अधीक्षक अविनाश गौतम ने बताया कि मृतक के परिजनों को बुलाकर वस्तुस्थिति बताई गई है। घटना की मजिस्ट्रेट जांच का अनुरोध किया जाएगा। साथ ही जेल प्रशासन आंतरिक जांच भी करेगा। ड्यूटी पर किसकी तैनाती थी, यह स्पष्ट करने के साथ ही जांच में आरोप तय कर कार्रवाई की जाएगी।