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UP News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पशुओं को बताया जीवन धन, कहा- इनके बिना मानव कल्याण की भावना अधूरी

Tue, 01 Jul 2025 10:24 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के 11वें दीक्षांत समारोह में मेधावियों को पदक व उपाधि देकर सम्मानित किया। उन्होंने पशु चिकित्सा क्षेत्र में उपाधि और पदक पाने वाले मेधावियों को बधाई दी।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के 11वें दीक्षांत समारोह में सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि प्लेग महामारी के बाद अस्तित्व में आए इस संस्थान ने पशुओं की बीमारियों के निदान से लेकर जैव सुरक्षा तक नए आयाम स्थापित किए हैं। यहां से डिग्री लेने वाले विद्यार्थियों को चाहिए कि वह सर्वे भवंतु सुखिन: की भावना से बेजुबान पशुओं के कल्याण के लिए काम करें। पशु नहीं, वास्तव में ये जीवन धन हैं। इनके बिना मानव कल्याण की भावना अधूरी है।

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राष्ट्रपति ने डिग्री लेने वाले छात्र-छात्राओं से कहा कि पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए सभी जीव-जंतुओं का निरोग होना आवश्यक है। मानव, प्रकृति व पशु, सभी एक-दूसरे पर आधारित हैं। हाल के कुछ वर्षों में गिद्ध विलुप्त हो गए। यह शायद रासायनिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल का दुष्प्रभाव है। हमें खुशी है कि वैज्ञानिक इन दवाओं के दुष्प्रभाव पर भी काम कर रहे हैं। नए पशु चिकित्सक और वैज्ञानिक भी इस दिशा में काम करें। 

यह भी पढ़ें- UP: 'पशु चिकित्सा में बेटियों की भागीदारी शुभ संकेत', IVRI में राष्ट्रपति मुर्मू के संबोधन की बड़ी बातें
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वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत देश के हर जिले में वैज्ञानिकों की दो हजार टीमें भेजी जाएंगी। वे किसानों को आधुनिक कृषि, उन्नत नस्लों, तकनीकी खेती और बागवानी की जानकारी देंगी। वैज्ञानिक अब सिर्फ लैब तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि खेत और खलिहान तक जाकर किसानों से जुड़ेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला
सीएम बोले- मूक पशुओं को आपसे मिलेगा नया जीवन 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पशुओं की मूक आवाज और समस्या आप लोग ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। आपके उपचार से पशुओं को नया जीवन मिलेगा। आपसे अपेक्षा है कि अपने ज्ञान से पशुओं की बीमारियों के निदान, टीकाकरण आदि पर जोर दें। उन्होंने कोरोना के दौर में आईवीआरआई की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र किया। कहा कि उस दौर में पशु चिकित्सा से इतर मानव जीवन बचाने के लिए इस संस्थान ने प्रदेश सरकार की मदद करते हुए दो लाख से ज्यादा कोविड परीक्षण किए।  

यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल - फोटो : अमर उजाला
वैज्ञानिक गांवों में जाएंगे तो दूर होगी समस्या : राज्यपाल
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि वैज्ञानिक व चिकित्सकों को चाहिए कि वे गांवों में जाकर पशुओं से संबंधित रोगों के निदान पर काम करें। गांव में किसान व महिलाएं आपको इस बारे में ज्यादा बेहतर तरीके से बताएंगी, तभी आप अच्छा उपचार कर सकेंगे। आप लोग पशु चिकित्सा व शोध के लिए सरकार से आर्थिक मदद ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों को मेडल नहीं मिला है, वह निराश न हों। इसके लिए अभी से और ज्यादा मेहनत करें।

छात्रा को मेडल पहनातीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : अमर उजाला
22 को पदक, 576 को मिली उपाधि
समारोह के दौरान 22 मेधावियों को पदक मिले। वर्ष 2021 से 2024 तक के 576 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई। इनमें बीवीएससी एडं एएच के 41, एमवीएससी के 328 और पीएचडी के 207 विद्यार्थी शामिल रहे। विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों को विभिन्न श्रेणियों में 35 विशिष्ट अवार्ड भी दिए गए। इसमें दो को मानद उपाधि, 14 को उत्कृष्ट महिला छात्र एवं वैज्ञानिक पुरस्कार व 19 विशिष्ट अवार्ड शामिल हैं।

बेटियां पशु चिकित्सा के क्षेत्र में भी आगे आ रही हैं, यह शुभ संकेत
राष्ट्रपति ने कहा कि आज पदक पाने वाले विद्यार्थियों में बड़ी संख्या छात्राओं की है। यह देखकर गर्व हो रहा है। बेटियां अन्य क्षेत्रों की तरह पशु चिकित्सा के क्षेत्र में भी आगे आ रही हैं। यह बहुत ही शुभ संकेत है। ज्यादातर जगहों पर पशुपालन व खेती-बाड़ी का काम परिवार की महिलाएं ही संभालती हैं। अब इस क्षेत्र से बेटियों का जुड़ाव देखकर मुझे अच्छा लगा। 

महापौर ने राष्ट्रपति को सौंपी शहर की चाबी - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपति को शहर की चाबी सौंप कर बोले महापौर- गर्व है हमें
बरेली में भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के दीक्षांत समारोह में शिरकत करने आईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को स्मृति चिह्न के साथ महापौर डॉ. उमेश गौतम ने शहर की चाबी सौंपी। महापौर ने कहा कि हमें गर्व है। हमारे शहर में राष्ट्रपति आईं और उन्होंने शहरवासियों का सम्मान स्वीकार किया। यह हम सबके लिए गर्व और गौरव का विषय है। महापौर ने कहा-चाबी सौंपने चाबी का मतलब- हम अपना शहर आपके हाथों में सौंप रहे हैं। यह सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक है। जो किसी शहर की विशेष अतिथि को दिए जाने की पुरानी परंपरा है। इसका महत्व आज भी बना हुआ है। 

 
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यह भी जानिए...मध्यकालीन शहरों से शुरू हुई थी चाबी सौंपने की परंपरा
मध्यकालीन शहरों में शहर की चाबी का वास्तविक महत्व होता था। तब शहर दीवारों से घिरे होते थे और रात में उनके गेट बंद कर दिए जाते थे। चाबियां शहर के प्रवेश और निकास को नियंत्रित करती थीं। किसी व्यक्ति को चाबी देने का मतलब होता था कि उन्हें स्वतंत्र रूप से आवाजाही की अनुमति है। जिसे चाबी दी जाती थी उसके प्रति यह उच्च विश्वास और सम्मान का प्रतीक होता था। 

धीरे-धीरे युग बदला और क्षेत्रफल का विस्तार हुआ और दीवारें खत्म हुईं तो भी चाबी सौंपने की परंपरा बनी रही। अब आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए राष्ट्राध्यक्ष, अपने देश में आए दूसरे देश के राष्ट्राध्यक्ष अथवा विशेष अतिथि तो सम्मानस्वरूप चाबी सौंपते हैं। हाल ही में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पुर्तगाल यात्रा के दौरान वहां के लिस्बन शहर में सिटी की ऑफ ऑनर की उपाधि के साथ शहर की चाबी दी गई थी।
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