बरेली। उच्च जोखिम सूची में दर्ज गर्भवतियों को बेहतर इलाज देने के लिए फर्स्ट रेफरल यूनिट वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मातृत्व एनीमिया प्रबंधन की कवायद शुरू हो गई है। इससे खून की कमी से जूझ रही महिलाओं को हायर सेंटर तक जाने से निजात मिलने की उम्मीद है।
बुधवार को सीएचसी फरीदपुर में मातृत्व एनीमिया मैनेजमेंट (एमएएम) सेवा शुरू हुई। इससे पूर्व भमाेरा, नवाबगंज, मीरगंज और बहेड़ी में यह सेवा शुरू की गई थी। कवायद से पूर्व खून की कमी या अन्य जटिलता पर गर्भवती को महिला या जिला अस्पताल भेजा जाता था। आवागमन में परेशानी होती थी।
चिकित्साधीक्षक डॉ. अनुराग गौतम के मुताबिक फरीदपुर सीएचसी पर क्षेत्र की तीन लाख आबादी को स्वास्थ्य सेवा मिलती है। सामान्य और सिजेरियन प्रसव की सुविधा है। एफआरयू पर प्रतिमाह चार एचआरपी दिवस में खून की कमी वाली गर्भवती को उच्च जोखिम सूची में दर्ज किया जाता है। ताकि प्रसव पूर्व उन्हें दवाओं से स्वस्थ बनाया जा सके।
सेंटर में किशोरियों, अस्पताल आने वाली महिलाओं और गर्भवती महिलाओं की जांच की जाएगी। खून की जांच के साथ ही मधुमेह, रक्तचाप आदि की जांच भी निशुल्क की जाएगी।
59 फीसदी किशोरी, 52 फीसदी महिलाओं में खून की कमी
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार 15 से 19 साल की 59.1 फीसदी और 15 से 49 साल की 52.2 फीसदी गर्भवती एनीमिया की चपेट में हैं। इनमें गर्भावस्था के दौरान कई तरह की समस्या होती है। रिपोर्ट के अनुसार पांच साल तक के बच्चों में कुपोषण की दर 17.9 फीसदी है। सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान मां स्वस्थ हो तो स्वस्थ शिशु का भी जन्म होता है।