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प्रधानमंत्री आवास योजना: नगर क्षेत्र में मिली मंजूरी, 40 किमी दूर गांव में बन रहे आवास, अब होगी वसूली

Fri, 01 Mar 2024 01:55 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली के फरीदपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में फर्जीवाड़ा सामने आया है। कुछ लोगों ने नगरी क्षेत्र में आवास स्वीकृत करा लिए, लेकिन निर्माण ग्रामीण क्षेत्र में करा रहे हैं। शिकायत मिलने पर जांच कराई गई तो इसका खुलासा हुआ। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बरेली के फरीदपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत कुछ लाभार्थियों ने सांठगांठ से आवास स्वीकृत करा लिए। अब वे शहरी क्षेत्र से 40 किमी दूर मगराशा गांव में मकान बनवा रहे हैं। जांच में इसका खुलासा हुआ तो अफसर भी हैरान रह गए। अब वसूली की बात कही जा रही है। 

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नगर पालिका के सफाई एवं खाद्य निरीक्षक सुरजीत कुमार चौहान ने बताया कि मोहल्ला लाइनपार मठिया निवासी अभिषेक सिंह ने आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी। जिन आवंटियों के नाम शिकायत में दिए गए थे, वे मौके पर नहीं मिले। 

इन लाभार्थियों को मिले आवास 
जांच में पता चला कि मोहल्ला लाइनपार मठिया में भूखंड दर्शाकर धनराशि स्वीकृत कराने के बाद मगराशा गांव में इन आवासों का निर्माण किया जा रहा है। जब वह गांव पहुंचे तो आवास बनते मिले। रीना देवी, पुष्पा देवी, नीरज कुमार व सोनवती के नाम से स्वीकृत मकानों में यह धांधलेबाजी की गई।
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इस संबंध में जब लाइनपार मठिया के सभासद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ये लोग उनके रिश्तेदार हैं। सभी गरीब तबके के हैं। इस वजह से उनका आवास स्वीकृत कराया गया है। पालिका सीमा में स्वीकृत मकानों का निर्माण दूसरी जगह कराने को जांच अधिकारी ने नियम विरुद्ध माना है। जल्द रिपोर्ट देने की बात कही है।

एपीओ डूडा राकेश कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है। अगर अपात्रों को लाभ दिया गया है तो यह गलत है। धनराशि न लौटाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अपात्रों को भी दे दिया आवास योजना का लाभ
सांठगांठ के जरिये कई अपात्रों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दे दिया गया। स्थलीय जांच में इसका खुलासा हुआ है। फरीदपुर के मोहल्ला परा में साईं बाबा मंदिर के पास के रहने वाले राज बहादुर सिंह ने 29 जनवरी को नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से अपात्रों के नाम आवास आवंटित करने की शिकायत की थी। 

उन्होंने बताया कि मोहल्ले के उमेश राठौर व विनीत राठौर का पक्का मकान बना हुआ है। उनके नाम पर जमीन भी है। इसके बाद भी उमेश की पत्नी पार्वती व विनीत की पत्नी शशिबाला के नाम आवास स्वीकृत कर दिया गया।
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पहले से बने हुए मकान में पिलर खड़े करके पुरानी लेंटर से जोड़कर उन्होंने धनराशि हड़प ली। मोहल्ले की ही अर्चना व सुमन को भी अपात्र होने के बावजूद योजना का लाभ दिया गया। पहले से पक्के मकान में रह रहे रामधार सिंह ने पत्नी भुवनेश्वरी देवी व बेटे पवन सिंह की पत्नी के नाम से आवेदन कराकर आवास ले लिया। वह आवास की आड़ में दुकानों का निर्माण करा रहे हैं।   

शिकायत का संज्ञान लेकर ईओ ने सफाई एवं खाद्य निरीक्षक सुरजीत सिंह चौहान को जांच के लिए मौके पर भेजा। जांच में अपात्रों को आवास देने की पुष्टि हो गई। सुरजीत सिंह ने जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी है। 
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