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प्रीजर्व रखने होंगे पॉजीटिव सैंपल

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बरेली। प्रवासियों की वापसी के बाद जिले में संक्रमितों की तादाद में तेजी से इजाफा हुआ है। ऐसे हालात में कारपोरेट लैब से पॉजिटिव मिली कोरोना की जांच रिपोर्ट सरकारी लैब में निगेटिव होने पर अफसर भी हैरान हैं। एक के बाद एक ऐसे कई मामले सामने आने के बाद अफसरों ने शासन को मामले की जानकारी दी तो उच्चाधिकारियों ने कारपोरेट लैब को पॉजिटिव मिले सैंपल प्रिजर्व रखने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद होने पर तत्काल सरकारी लैब से क्रॉस चेकिंग कराई जा सके। संबंधित लैब को इन निर्देशों की जानकारी दे दी गई है।
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बीती दो मई को रामपुर गार्डन के एक अस्पताल में जांच कराने आई फरीदपुर की एक गर्भवती का सैंपल कारपोरेट लैब की जांच में पॉजिटिव आया था। जबकि आईवीआरआई की जांच में यही सैंपल निगेटिव निकला था। मामले को गंभीरता से लेकर एक दिन बाद फिर सैंपल जांच को भेजा गया और फिर रिपोर्ट निगेटिव ही मिली। इसी तरह मिनी बाईपास स्थित एक अस्पताल में भी पीलीभीत के एक युवक की रिपोर्ट कारपोरेट लैब से पॉजिटिव आई थी। क्रॉस टेस्ट में यह निगेटिव रही। इसके बाद सीबी गंज के एक युवक की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। वह भी क्रॉस टेस्ट में निगेटिव रहा। इसी तरह अन्य कई मामलेे सामने आने के बाद अफसरों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन को सूचित किया था। जिस पर संबंधित कारपोरेट लैब से जांच कराने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
‘कारपोरेट लैब की जांच रिपोर्ट में असमंजस की स्थिति होने की वजह से बीते दिनों शासन से मार्गदर्शन मांगा गया था। उन्होंने पॉजिटिव रिपोर्ट के सैंपल को दो माह तक प्रिजर्व रखने के निर्देश दिए हैं। ताकि किसी तरह के दावे पर उसकी क्रॉस जांच कराई जा सके।’
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- डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
दूसरी लैब से भी मिली संदिग्ध जांच रिपोर्ट
एक कारपोरेट लैब पर पाबंदी लगने के बाद दूसरी कारपोरेट लैब में जांच के लिए निजी अस्पताल सैंपल भेजने लगे मगर यहां भी मामला उलझन वाला ही रहा। एक अस्पताल में ऑपरेशन कराने से पहले एक युवक का सैंपल पॉजिटिव आया। युवक को आइसोलेट किए जाने की कवायद शुरू कर दी गई। सर्विलांस टीम संक्रमण का सोर्स और परिजनों की खोजबीन में जुट गई। मगर करीब दो घंटे बाद पता चला कि युवक की रिपोर्ट गलत अपलोड कर दी गई है। जिस पर लैब संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। जवाब संतोषजनक जवाब न होने पर शासन स्तर से मार्गदर्शन मांगा गया। जिस पर अब शासन ने जांच के बाद पॉजिटिव मिले सैंपल की रिपोर्ट को दो माह तक प्रिजर्व रखने के निर्देश दिए गए हैं।
गलत जांच रिपोर्ट से मरीज और अफसर दोनों होते हैं परेशान
सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल के मुताबिक गलत जांच रिपोर्ट मिलने पर संबंधित व्यक्ति के साथ ही प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक युवक के संक्रमित मिलने पर संबंधित अस्पताल स्टाफ, परिजन और उसके संपर्क में आने वालों को क्वारंटीन कराया जाता है। युवक को कोरोना वार्ड में आइसोलेट करना पड़ता है। इलाका हॉटस्पॉट बनता है, जिससे वहां के रहने वालों को बंदिशों के बीच रहना पड़ता है। इसके अलावा स्वस्थ व्यक्ति को जाने अनजाने संक्रमित के बीच रहना पड़ता है। जिससे सभी परेशान होते हैं।
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