जगह के चयन पर प्रमुख सचिव हुए नाराज, निगम अफसरों के हाथ-पांव फूले
बरेली। सेटेलाइट पर शौचालय के पास बने शेल्टर होम में परफ्यूम छिड़कने के बाद भी बदबू दूर नहीं हुई। प्रमुख सचिव नवनीत सहगल रात करीब साढ़े दस बजे यहां पहुंचे तो बदबू का अहसास कर नाराज होने लगे। अफसरों से पूछा कि इसे किसी अन्य जगह पर भी तो बनाया जा सकता था। इस पर अफसरों के हाथ-पांव फूल गए लेकिन वह बिना कुछ कहे गाड़ी में जाकर बैठे तो सबने राहत की सांस ली।
बृहस्पतिवार रात प्रमुख सचिव नवनीत सहगल सर्किट हाउस से शहर में दौरे के लिए निकले तो नगर आयुक्त समेत अन्य अफसर भी साथ थे। निगम अधिकारी उन्हें हरूनगला स्थित शेल्टर होम ले जाने के उद्देश्य से निकले थे लेकिन वह सेटेलाइट पर बने अस्थाई आश्रय स्थल की ओर मुड़ गए। यह देख निगम अफसरों के हाथ पांव फूल गए। वहीं, प्रमुख सचिव को आता देख कर्मचारियों ने वहां जल्दी-जल्दी चादरें बिछाना शुरू किया। यहां प्रमुख सचिव ने वहां बैठे लोगों से पूछा कब से यहां रुके हो। इसी बीच बदबू का झोंका आया तो अफसरों से शौचालय और पेशाबघर के बीच शेल्टर होम बनाने पर नाराजगी व्यक्त की। नगर आयुक्त से पूछा कि इसे किसी अन्य जगह भी तो बना सकते थे। इस पर निगम अफसरों ने उत्तर दिया कि कई सालों से यहीं बनाया जा रहा है। इस पर प्रमुख सचिव कुछ नहीं बोले और अपनी गाड़ी में बैठ गए।
‘किसने बताया इस आश्रय स्थल का पता’
सेटेलाइट के बाद प्रमुख सचिव हरूनगला शेल्टर होम पहुंचे। यहां पूरा माहौल किसी होटल की तरह दिखाई दिया। हर बेड पर एक आदमी लेटा था। साफ कंबल और चादरें ओढ़े 25 से अधिक लोग वहां मिले। इनमें से एक आदमी से प्रमुख सचिव ने पूछा कि कब आए, तो उसने सुबह आने की बात कही। काम पूछा तो एक कंपनी में इंटरव्यू बताया लेकिन कंपनी का नाम नहीं बता सका। उन्होंने पूछा कि शेल्टर होम का पता किसने बताया तो उसने कहा एक होटल वाले ने बताया था। इसके बाद प्रमुख सचिव ने अन्य लोगों से पूछा, सब लोग पास के ही गांव के हो। इस पर वहां लेटे कई लोग उठ बैठे। एक ने लखनऊ से आना बताया तो दूसरे खुद को ठेला लगाने वाला बताया। प्रमुख सचिव ने पूछा पैसा लिया जाता है तो एक अन्य व्यक्ति ने इनकार कर दिया। इसके बाद प्रमुख सचिव मुस्कुराकर वहां से निकल गए।
दिन भर दुरुस्त की गईं व्यवस्थाएं
प्रमुख सचिव के दौरे के पूर्व अमर उजाला की टीम सेटेलाइट पर शेल्टर होम पहुंची तो वहां सुगंध का अहसास हुआ। वहां काम कर रहे कर्मचारी ने बताया कि कोई बड़े साहब आ रहे हैं। उन्हें लेकर तैयारी है। फर्स्ट एडबॉक्स से लेकर कूड़ेदान तक रखे गए हैं। चादर, रजाई के कवर भी बदले गए। साफ टेंट लगाकर अगरबत्ती जलाई गई ताकि कोई कोर कसर न रह जाए। निगम के अधिकारियों ने भी दिन में कई बार वहां का निरीक्षण किया।