भाजपा के बुजुर्ग नेताओं ने शिवसेना को दोषी बताया तो विपक्षियोें ने कहा- जनता से धोखा है यह
बरेली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बनाने को लेकर मची खींचतान के बीच मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। भाजपा-शिवसेना ने यहां गठबंधन करके चुनाव लड़ा लेकिन सरकार बनाने के मुद्दे पर उनकी राहें जुदा हो गईं। भाजपा यहां सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर सामने आई थी लेकिन बहुमत के अभाव में सरकार बनाने से इंकार कर दिया। इसके बाद शिवसेना अपनी धुरविरोधी कांग्रेस की मदद से सरकार बनाने की कवायद में जुटी लेकिन कामयाब नहीं हुई। इसी बीच मंगलवार शाम केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की घोषणा कर दी। महाराष्ट्र में तेजी से बदले इस राजनीतिक घटनाक्रम से सियासतदां भी हैरान हैं। हालांकि, भाजपा के बुजुर्ग नेता इसके लिए शिवसेना को ही दोषी ठहरा रहे हैं, वहीं विपक्षी इसे जनता के साथ धोखा और लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश बता रहे हैं।
शिवसेना ने भाजपा के साथ चुनाव लड़ा। अब सरकार के मुद्दे पर अलग होना जनादेश का अपमान और जनता के साथ धोखा है। कल तक शिवसेना कांग्रेस को गलत बता रही थी। अब सत्ता के लिए साथ आ रहे हैं, राजनीति में इतनी भी गिरावट ठीक नहीं है। - राजकुमार अग्रवाल, पूर्व मेयर
शिवसेना और भाजपा मित्र थे, इन्हें मिलकर सरकार बनानी चाहिए थी। आज तक यही होता आया है कि जिसकी सीटें ज्यादा, मुख्यमंत्री भी उसी का। जब छोटे-बड़े भाई जैसी बात थी तो शिवसेना को शर्तें नहीं रखनी चाहिए थीं। दोबारा चुनाव जनभावनाओं का अपमान है। - सुभाष पटेल, पूर्व मेयर
राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है, यहां न कोई स्थायी दोस्त होता है और न दुश्मन। हर पार्टी दूसरे को बेवकूफ बनाकर पुराने मामले सेटल करने में लगी है। जनता की स्थिति द्रौपदी जैसी है, पांडव जुआ में दांव पर लगाते हैं और कौरव जीतकर चीरहरण करते हैं। - डॉ. आईएस तोमर, पूर्व मेयर
महाराष्ट्र समेत जहां कहीं भी लोकतंत्र का मखौल बनाया जा रहा है, यह जनता के हित में नहीं है। इससे आम जनता का ही नुकसान होगा, राजनीतिक दल प्रभावित नहीं होंगे। इस तरह लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। - प्रवीण सिंह ऐरन, पूर्व सांसद